Supreme Court Updates Advocates Of Bar Associations Came To Meet Cji On Yashwant Verma Case – Amar Ujala Hindi News Live – Sc:जस्टिस यशवंत वर्मा मामले पर Cji खन्ना का बार एसोसिएशंस को आश्वासन, कहा

दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी घर से कथित तौर पर आधी जली हुई नकदी मिलने के मामले को लेकर गुरुवार को अलग-अलग राज्यों की हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन के अधिवक्ता मुख्य न्यायाधीश से मिलने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। उन्होंने मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने आश्वासन दिया है कि वे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के तबादले की कॉलेजियम की सिफारिश वापस लेने की वकीलों की मांग पर विचार करेंगे।

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उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ पीठ, गुजरात, केरल, कर्नाटक और मध्य प्रदेश की जबलपुर पीठ के बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने गुरुवार दोपहर को मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना समेत न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ से मुलाकात की। बैठक के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश ने बार निकायों के ज्ञापन पर विचार-विमर्श किया और उनकी मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन भी अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर विचार करेगा। 

ज्ञापन में यह की गई मांग

अलग-अलग राज्यों के हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। साथ ही मामले में पारदर्शिता अपनाने, दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट और अन्य सामग्री को सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के लिए मुख्य न्यायाधीश के फैसले की सराहना की गई।

ज्ञापन में कहा गया कि बार एसोसिएशन मांग करती है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का स्थानांतरण वापस लिया जाए तथा पहले से वापस लिए गए न्यायिक कार्यों के अतिरिक्त सभी प्रशासनिक कार्य भी वापस लिए जाएं। ज्ञापन में दावा किया गया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट के अनुसार आग की घटना के एक दिन बाद किसी ने न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से सामान हटा दिया था। इससे साफ है कि ऐसे अपराधों में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं और एफआईआर दर्ज न होने से उनके अभियोजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

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क्या है मामला?

कथित नकदी की बरामदगी 14 मार्च को रात करीब 11.35 बजे जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में आग लगने के बाद हुई। मौके पर अग्निशमन अधिकारी पहुंचे थे। विवाद के मद्देनजर सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति वर्मा को उनके पैतृक इलाहाबाद उच्च न्यायालय वापस भेजने की सिफारिश की। 22 मार्च को सीजेआई ने आरोपों की आंतरिक जांच करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया और घटना में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की जांच रिपोर्ट अपलोड करने का फैसला किया। इसमें कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी मिलने की तस्वीरें और वीडियो शामिल थे। हालांकि, न्यायमूर्ति वर्मा ने आरोपों को खारिज किया और कहा कि उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा स्टोररूम में कभी भी कोई नकदी नहीं रखी गई। इस बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त इन-हाउस कमेटी के तीन सदस्यों ने आरोपों की जांच शुरू करने के लिए न्यायमूर्ति वर्मा के आवास का दौरा किया था।