03अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़े एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी (NIC) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) को आरोपी बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश भी दिया है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि फर्जी पॉलिसी सामने आने के बावजूद आपराधिक मामला दर्ज न करना बीमा कंपनी की गंभीर लापरवाही दर्शाता है। कोर्ट ने इसे “जिम्मेदारी की घोर कमी” करार दिया।
अदालत ने टिप्पणी की कि अब समय आ गया है जब सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि इंश्योरेंस कंपनियां अपनी जिम्मेदारी और सतर्कता का पालन करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि बीमा कंपनियां आम जनता के पैसे से दावे चुकाती हैं, इसलिए उनकी जवाबदेही और भी बढ़ जाती है। इस मामले को अदालत ने “राष्ट्रीय महत्व का टेस्ट केस” भी बताया।
कोर्ट ने SIT को निर्देश दिया कि वह नया केस दर्ज कर जांच करे, जिसमें NIC के CMD, स्थानीय ब्रांच मैनेजर और अन्य संबंधित कर्मचारियों के साथ-साथ बस मालिक को भी आरोपी बनाया जाए। जांच का मुख्य उद्देश्य फर्जी और मनगढ़ंत इंश्योरेंस दस्तावेजों की सच्चाई सामने लाना होगा।
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु पुलिस के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) को भी कोर्ट में पेश होना पड़ा। उन्होंने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी, जिसे बेंच ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने पहले उनके उस रुख पर आपत्ति जताई थी, जिसमें कहा गया था कि मोटर दुर्घटना मामलों में पुलिस के लिए इंश्योरेंस दस्तावेजों की सत्यता जांचना जरूरी नहीं है।
यह मामला एक सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें के. सरवनन नामक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। उसने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी। हालांकि बीमा कंपनी ने पॉलिसी को अवैध बताते हुए दावा खारिज करने की मांग की थी, लेकिन MACT और बाद में मद्रास हाईकोर्ट ने कंपनी की दलीलें खारिज कर दीं। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब SIT जांच के आदेश दिए गए हैं।













