10 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: देश में वंदे मातरम् को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर सुन्नी और शिया मुस्लिम धर्मगुरुओं की राय अलग-अलग सामने आई है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी का कहना है कि वंदे मातरम् के कुछ श्लोकों में देश को देवता मानकर पूजा की बात कही गई है, जो इस्लाम की एकेश्वरवादी मान्यता के खिलाफ है। उन्होंने इसे ‘शिर्क’ बताते हुए कहा कि मुसलमान अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं कर सकता और किसी को उसकी धार्मिक आस्था के विरुद्ध गीत या नारा गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
वहीं ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस रुख का विरोध किया है। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि इस्लाम मातृभूमि को सलाम करने से नहीं रोकता और वंदे मातरम् को देशभक्ति का प्रतीक माना जाना चाहिए। उन्होंने धर्म को देश से ऊपर रखने की सोच को ‘तालिबान जैसी मानसिकता’ करार दिया और वंदे मातरम् के सही उर्दू अनुवाद की मांग की, ताकि इसके अर्थ को लेकर भ्रम दूर हो सके।













