August 31,2026 Fact Recorder
Business Desk: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। सरकार की ओर से कीमतों पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए जाने के बावजूद खुदरा बाजार में चीनी के भाव लगातार ऊंचे बने हुए हैं। देश के कई हिस्सों में चीनी 60 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर बिक रही है, जबकि अधिकतम खुदरा कीमत 74 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 30 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 64.24 रुपये प्रति किलो रही। एक सप्ताह पहले यह 63.12 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक सप्ताह में कीमत में करीब 1.77 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, एक महीने की तुलना में चीनी करीब 30 फीसदी महंगी हो चुकी है।
कई शहरों में 60 रुपये से ज्यादा भाव
देश के अलग-अलग शहरों में चीनी की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है। 30 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में चीनी करीब 62 रुपये प्रति किलो, मुंबई में 66 रुपये, चेन्नई में 63 रुपये और रांची में करीब 68 रुपये प्रति किलो बिक रही थी।
देशभर में चीनी की अधिकतम खुदरा कीमत 74 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जबकि न्यूनतम कीमत करीब 40 रुपये प्रति किलो रही।
थोक बाजार में भी बढ़े दाम
सिर्फ खुदरा बाजार ही नहीं, बल्कि थोक बाजार में भी चीनी के भाव में तेजी बनी हुई है। 30 अगस्त को चीनी की औसत थोक कीमत करीब 59.73 रुपये प्रति किलो रही। एक सप्ताह पहले यह 58.66 रुपये प्रति किलो थी।
थोक कीमतों में एक महीने के दौरान करीब 31 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में भी कीमत लगभग 38.63 फीसदी अधिक बताई जा रही है।
मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट
चीनी की कीमतों में तेजी का एक दिलचस्प पहलू यह है कि मिल से निकलने वाली चीनी यानी एक्स-मिल कीमतों में इसके उलट गिरावट देखी गई है।
सरकार द्वारा करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने के बाद मिल स्तर पर चीनी की कीमत में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है। इसके बावजूद खुदरा बाजार में इसका असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है।
उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, मिल और थोक कीमतों के बीच 2 से 3 रुपये प्रति किलो और मिल स्तर तथा खुदरा बाजार के बीच करीब 7 से 8 रुपये प्रति किलो का अंतर सामान्य माना जाता है।
सरकार ने उठाए कई कदम
चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सरकार ने जहां कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है, वहीं थोक खरीदारों और डीलरों के लिए चीनी के स्टॉक से जुड़े नियमों को भी सख्त किया है।
इसके अलावा सरकार ने चीनी के निर्यात पर भी रोक लगाई है। केंद्र का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और कीमतों में बढ़ोतरी के लिए मिल स्तर पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
उत्पादन घटने से बढ़ी चिंता
चीनी की कीमतों को लेकर चिंता की एक बड़ी वजह उत्पादन का अनुमान भी है। 2025-26 मार्केटिंग ईयर में देश में चीनी उत्पादन पहले लगाए गए 343 लाख टन के अनुमान से घटकर करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है।
वहीं, देश में सालाना घरेलू खपत करीब 280-285 लाख टन रहने की संभावना है। ऐसे में उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक को लेकर बाजार की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है।
आम लोगों पर पड़ेगा सीधा असर
चीनी के भाव में लगातार बढ़ोतरी का असर सिर्फ घरों के बजट पर ही नहीं, बल्कि मिठाई, बेकरी, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में सरकार के आयात और स्टॉक संबंधी फैसलों का खुदरा कीमतों पर कितना असर होता है, इस पर बाजार की नजर रहेगी।













