JNU में आपत्तिजनक नारेबाजी पर सख्ती: दोषी पाए गए छात्रों की डिग्री हो सकती है सस्पेंड, कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव

07 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Education Desk:  जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक, विवादास्पद और भड़काऊ नारे लगाने के मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने साफ किया है कि जांच में यदि आरोपी छात्र दोषी पाए जाते हैं, तो उनकी डिग्री तक सस्पेंड की जा सकती है।

विश्वविद्यालय प्रशासन बुधवार को इस मामले में प्रोक्टोरियल जांच के आदेश जारी करेगा। जांच के दौरान वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपित छात्रों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। यदि छात्र आरोपों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते और दोष सिद्ध होता है, तो उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

संभावित कार्रवाई में एक या एक से अधिक सेमेस्टर का निलंबन, हॉस्टल खाली कराना, दाखिला रद्द करना, जुर्माना लगाना और यहां तक कि विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध भी शामिल हो सकता है। गंभीर मामलों में स्थायी निष्कासन तक का प्रावधान है।

JNU प्रशासन ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र होते हैं, उन्हें नफरत की प्रयोगशाला बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा, गैर-कानूनी गतिविधि या देश-विरोधी आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासन ने दोहराया कि इस घटना में शामिल पाए जाने वाले छात्रों को सस्पेंशन, निष्कासन और विश्वविद्यालय से स्थायी रूप से बाहर किए जाने जैसी सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।