02 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: ईरान-इजरायल टकराव के बाद पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को अनिश्चित काल के लिए बंद करने का ऐलान किया है। साथ ही लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार Bab el-Mandeb में भी व्यापारिक गतिविधियां ठप होने की खबरें हैं।
ये दोनों जलमार्ग दुनिया के ऊर्जा और कंटेनर व्यापार की लाइफलाइन माने जाते हैं। इनके बाधित होने से वैश्विक सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ा है और भारत समेत कई आयात-निर्भर देशों की चिंता बढ़ गई है।
समुद्री नाकेबंदी से बढ़ा मालभाड़ा, लंबा हुआ रास्ता
होर्मुज और बाब अल-मंडेब के बंद होने के कारण जहाजों को अब अफ्रीका के दक्षिणी सिरे Cape of Good Hope से लंबा चक्कर लगाकर यूरोप और एशिया के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है।
इसका सीधा असर:
ईंधन लागत में भारी वृद्धि
बीमा प्रीमियम में उछाल
डिलीवरी में देरी
कंटेनर उपलब्धता में कमी
वित्तीय सेवा कंपनी JM Financial की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल आयात-निर्यात (EXIM) का लगभग 31% हिस्सा मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र से जुड़ा है। ऐसे में समुद्री मार्ग बाधित होने से भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है।
अडानी और JSW पर सीधा असर
भारत के सबसे बड़े निजी पोर्ट ऑपरेटर Adani Ports and Special Economic Zone (APSEZ) के कुल कार्गो हैंडलिंग में खाड़ी क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी है।
संभावित असर:
तेल और LNG कार्गो में कमी
कंटेनर ट्रैफिक में गिरावट
फ्रेट रेट अस्थिरता
ऑपरेशनल मार्जिन पर दबाव
इसी तरह JSW Infrastructure के यूएई के फुजैरा स्थित लिक्विड स्टोरेज टर्मिनल पर भी संकट का असर पड़ सकता है। कंपनी के मुनाफे में इस टर्मिनल की उल्लेखनीय हिस्सेदारी रही है। ओमान में प्रस्तावित विस्तार योजनाएं भी अनिश्चितता की चपेट में आ सकती हैं।
एयरपोर्ट सेक्टर भी प्रभावित
पश्चिम एशिया के लिए उड़ानों में कमी आने से GMR Airports जैसे एयरपोर्ट ऑपरेटरों को भी झटका लग सकता है।
ट्रांजिट यात्रियों की संख्या घट सकती है
ड्यूटी-फ्री, लाउंज और रिटेल आय पर असर
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से होने वाली कमाई में गिरावट
आम आदमी की जेब पर सीधा वार
सबसे बड़ी चिंता रसोई गैस (LPG) और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर है।
भारत अपनी लगभग 65% LPG जरूरत आयात करता है
इसका 90% से ज्यादा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है
प्रोपेन कीमतों में पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछाल
यदि संकट लंबा चलता है:
LPG सिलेंडर महंगे हो सकते हैं
पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी संभव
खाद्य तेल, प्लास्टिक, उर्वरक और रोजमर्रा के सामान की लागत बढ़ सकती है
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समुद्री मार्ग जल्द नहीं खुलते, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और गहराएगी। भारत को वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और रणनीतिक तेल भंडार के उपयोग पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
फिलहाल, यह संकट सिर्फ एक भू-राजनीतिक घटना नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की नब्ज पर सीधा दबाव है — और इसका असर बंदरगाहों से लेकर आम रसोई तक महसूस किया जा सकता है।













