भारत में आवारा कुत्तों के काटने और रेबीज के आंकड़े; दुनिया के अलग-अलग देशों में क्या हैं नियम

भारत में आवारा कुत्तों के काटने और रेबीज के आंकड़े; दुनिया के अलग-अलग देशों में क्या हैं नियम

13 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk: भारत में आवारा कुत्तों की समस्या: आंकड़े, कारण और दुनिया के उपाय
सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाने का अभियान शुरू होने वाला है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने छह से आठ हफ्तों में सभी आवारा कुत्तों को राजधानी और आसपास के शहरों से हटाने का निर्देश दिया है, ताकि नवजात और छोटे बच्चों को काटने और रेबीज के खतरे से बचाया जा सके। यह आदेश दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी लागू होगा।

फैसले के बाद नेताओं, सेलिब्रिटी और सामाजिक संगठनों में बहस तेज हो गई है। सवाल यह है कि यह अभियान कैसे चलेगा और भारत में यह समस्या कितनी गंभीर है।

भारत में आवारा कुत्तों की स्थिति
आधिकारिक संख्या: 2019 की 20वीं पशुधन जनगणना में देशभर में 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते दर्ज हुए (2012 में 1.71 करोड़)।

अनौपचारिक अनुमान: 6 से 6.2 करोड़ तक।

सबसे अधिक प्रभावित राज्य: उत्तर प्रदेश और कर्नाटक।

दिल्ली का अनुमान: 2019 में 8 लाख, अब लगभग 10 लाख।

कुत्तों के हमले और मौतों के कारण
2022 में एको इंश्योरेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, छह महानगरों में सड़क हादसों के 58% मामले आवारा कुत्तों के कारण हुए।

गाय-भैंस के कारण 25.8% हादसे दर्ज हुए।

जनवरी-जून 2022 में कुल 1,376 पशु-जनित हादसों में से 804 कुत्तों की वजह से थे।

दुनिया में आवारा कुत्तों से निपटने के उदाहरण
नीदरलैंड्स

19वीं–20वीं सदी में गंभीर समस्या।

शुरू में पकड़ने और टैक्स लगाने के उपाय नाकाम रहे।

बाद में नसबंदी, टीकाकरण, पंजीकरण और सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम शुरू हुए।

1923 के बाद से रेबीज-मुक्त और अब 90% घरों में पालतू कुत्ते।

थाईलैंड

बैंकॉक में मोबाइल क्लिनिक, डेटा ट्रैकिंग और सामुदायिक अभियान (2016–2023)।

कुत्तों के काटने और रेबीज मामलों में कमी।

भूटान

दुनिया का पहला देश जिसने सभी आवारा कुत्तों का पूरी तरह टीकाकरण और नसबंदी की।

छोटे पैमाने पर तेज़ी से लागू कर सफलता पाई।

तुर्किये

2004 में नीदरलैंड्स जैसा मॉडल लाने की कोशिश, लेकिन कम फंड और भ्रष्टाचार से असफल।

2024 में नया कानून: आक्रामक/बीमार कुत्तों को मारने और स्वस्थ कुत्तों को शेल्टर व नसबंदी करने का प्रावधान।

पशु अधिकार समूहों ने कड़ी आलोचना की।

निष्कर्ष
भारत में आवारा कुत्तों की समस्या व्यापक और गंभीर है। इसका समाधान केवल पकड़ने या हटाने से नहीं, बल्कि नसबंदी, टीकाकरण, पंजीकरण, आश्रय गृह और जागरूकता के संयुक्त प्रयास से संभव है। अन्य देशों के अनुभव दिखाते हैं कि लंबी अवधि की रणनीति से ही स्थायी समाधान मिलता है।