22 जुलाई 2025 फैक्टर रिकॉर्डर
Haryana Desk: कुरुक्षेत्र में बनेगा देश का पहला इमर्सिव आध्यात्मिक स्थल, सिख और गुरु रविदास संग्रहालय से बढ़ेगा धार्मिक पर्यटन हरियाणा के विरासत और पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि कुरुक्षेत्र के उमरी में गुरु रविदास भवन एवं संग्रहालय और सिख संग्रहालय के निर्माण के लिए उच्च स्तरीय निगरानी समिति का गठन कर दिया गया है। यह निर्णय पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के संयुक्त प्रयासों से लिया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत गुरु रविदास भवन एवं संग्रहालय को 5 एकड़ और सिख संग्रहालय को 3 एकड़ में स्थापित किया जाएगा।
डॉ. शर्मा ने बताया कि इन दोनों संग्रहालयों को न केवल भव्य रूप से विकसित किया जाएगा, बल्कि इन्हें वैश्विक पहचान दिलाने वाले आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में तैयार किया जाएगा। इस परियोजना की निगरानी के लिए गठित समिति की अध्यक्षता विरासत एवं पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव करेंगे, जबकि अन्य सदस्यों में पुरातत्व विभाग के निदेशक, कुरुक्षेत्र के उपायुक्त, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी प्रभलीन, उपनिदेशक बनानी भट्टाचार्य, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अभियंता, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे।
डॉ. शर्मा ने बताया कि यह देश का पहला इमर्सिव (immersive) आध्यात्मिक और पर्यटन स्थल होगा, जो गुरु रविदास की समावेशी और समानता की शिक्षाओं पर आधारित होगा। यह केंद्र सामाजिक समरसता, शिक्षा और मानसिक चेतना के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगा, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचेंगे।
इस स्थल पर गुरु रविदास की भव्य प्रतिमा के साथ एक ओपन-एयर थिएटर, आधुनिक ऑडिटोरियम, ध्यान केंद्र, अनुसंधान और पुस्तकालय, गुरबानी हॉल, संग्रहालय और डिजिटल गैलरी का निर्माण प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य आगंतुकों को प्रेम, शांति और विनम्रता जैसे मूल्यों के साथ गहराई से जोड़ना है।
इसी तरह, सिख संग्रहालय भी राज्य की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर को संजोएगा। यह संग्रहालय सिख गुरुओं के जीवन, शिक्षाओं और हरियाणा से उनके संबंधों पर विशेष जोर देगा। गुरु नानक देव से लेकर गुरु गोबिंद सिंह तक की ऐतिहासिक घटनाओं को सत्यापित जानकारी के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।
डॉ. शर्मा ने बताया कि सिख विरासत को दर्शाने के लिए संग्रहालय में पारंपरिक और आधुनिक माध्यमों जैसे भित्ति चित्र, डायोरामा, डिजिटल आर्ट, होलोग्राफी, लेज़र शो और इंटरैक्टिव तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि श्रद्धालु और पर्यटक इतिहास को जीवंत रूप में अनुभव कर सकें।
यह दोनों संग्रहालय न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगे बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाएंगे।













