Sonipat Now OTP facility available seed distribution during Kharif season Department of Agriculture and Farmers Welfare | सोनीपत में खरीफ सीजन में अब ओ.टी.पी. से मिलेगी सुविधा: सब्सिडी पर होगा बीज वितरण; कृषि विभाग की पारदर्शिता लाने की पहल – Sonipat News

कृषि उपनिदेशक डॉ. पवन शर्मा

हरियाणा के सोनीपत कृषि विभाग ने खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत पहली बार किसानों को ओ.टी.पी. (वन टाइम पासवर्ड) के माध्यम से सब्सिडी पर बीज वितरित करने की प्रक्रिया शुरू की है। विभाग ने मूंग की खेती को बढ़ावा देने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने के उद्देश्

अब तक किसानों को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण के बाद सीधे बीज उपलब्ध कराया जाता था। लेकिन कई किसानों की शिकायत थी कि उनके नाम पर बीज वितरित दिखाया गया, जबकि उन्होंने बीज प्राप्त ही नहीं किया। इस समस्या को दूर करने के लिए अब ओ.टी.पी. आधारित प्रणाली लागू की गई है। किसान को अपना मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा, जिस पर ओ.टी.पी. आएगा, और उसी के बाद बीज वितरण होगा। इससे वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और कोई भी अनियमितता नहीं होगी।

भूमि की सेहत सुधारने पर जोर

कृषि विभाग न केवल किसानों को मूंग का बीज उपलब्ध करवा रहा है, बल्कि भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए भी प्रयास कर रहा है। मूंग और ढैंचा जैसे फसलों का उपयोग हरी खाद के रूप में किया जाता है, जिससे मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है और रासायनिक खादों की जरूरत कम होती है। इससे अगली फसल की उत्पादकता भी बढ़ती है और किसानों को कम लागत में अधिक लाभ मिलता है।

मूंग बीज पर 75% सब्सिडी, 600 क्विंटल का वितरण

इस साल सोनीपत जिले में कृषि विभाग किसानों को 600 क्विंटल मूंग का बीज वितरित करेगा। इसके लिए किसानों को 20 अप्रैल तक पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। सरकार द्वारा किसानों को मूंग के बीज पर 75% तक की सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा, जल्द ही ढैंचा का बीज भी सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे खेतों की उर्वरता को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कृषि अधिकारी बोले

कृषि उपनिदेशक डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि खेत की सेहत सुधारने के लिए किसानों को ढैंचा और मूंग का बीज सब्सिडी पर दिया जाएगा। मूंग के 600 क्विंटल बीज का वितरण किया जाएगा, जबकि ढैंचा के बीज की लोकेशन जल्द मिलेगी। इस बार किसानों को पोर्टल पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा और ओ.टी.पी. सत्यापन के बाद ही बीज मिलेगा। इससे किसानों को बिना किसी परेशानी के पारदर्शी व्यवस्था के तहत बीज मिल सकेगा।

यह नई पहल किसानों को न केवल आर्थिक रूप से मदद करेगी, बल्कि भूमि की उर्वरता बनाए रखते हुए फसल उत्पादन को भी बेहतर बनाएगी।