12 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Chandigarh Desk: चंडीगढ़ नगर निगम के चर्चित स्मार्ट पार्किंग प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में गिरफ्तार आरोपी संदीप भोरा को जिला अदालत से जमानत मिल गई है। अदालत ने सरकारी पक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
संदीप भोरा को पुलिस ने 28 जनवरी को गिरफ्तार किया था। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ तीन गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
बचाव पक्ष की दलील
आरोपी की ओर से अधिवक्ता रमन सिहाग ने अदालत में दलील दी कि यह मामला आपराधिक न होकर सिविल प्रकृति का है। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ आपराधिक मंशा का कोई ठोस सबूत नहीं है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि इस मामले में अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
सरकारी पक्ष का विरोध
वहीं सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी प्रभावशाली व्यक्ति है और जमानत मिलने पर वह देश छोड़ सकता है या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना।
क्या है पूरा मामला
मामले के अनुसार टोल इंफ्रा लिमिटेड कंपनी ने नगर निगम चंडीगढ़ के साथ 25 पार्किंग साइट्स और एक मल्टीलेवल पार्किंग के संचालन का अनुबंध किया था। संदीप भोरा इस कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत था।
अनुबंध के तहत कंपनी ने 1.47 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करवाई थी और करीब 3 करोड़ रुपये स्मार्ट पार्किंग प्रोजेक्ट में निवेश किया था। कंपनी को सातवीं तिमाही (19 दिसंबर 2018 से 18 मार्च 2019) की एडवांस लाइसेंस फीस जमा करनी थी, लेकिन घाटे का हवाला देते हुए भुगतान नहीं किया गया।
इसके बाद नगर निगम ने लाइसेंस रद्द कर बैंक गारंटी जब्त कर ली। आरोप है कि कंपनी की ओर से निगम को 3.69 करोड़ रुपये के पांच चेक दिए गए थे, जिनमें से एक चेक बाउंस हो गया। इसके बाद निगम की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
अब इस मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी।













