19 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Himachal Desk : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश सरकार के सुधारात्मक प्रयासों से स्वास्थ्य क्षेत्र में एक वर्ष के भीतर क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेंगे और अगले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश देश का अग्रणी स्वास्थ्य राज्य बनेगा। उन्होंने बताया कि जायका चरण-2 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं पर 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि विश्वस्तरीय उपकरणों से स्वास्थ्य संस्थानों को लैस करने के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री पीटरहॉफ, शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय संवाद सत्र को संबोधित कर रहे थे, जहां पहली बार सीएमओ, बीएमओ और चिकित्सा अधीक्षकों के साथ सीधा संवाद हुआ। करीब साढ़े चार घंटे चले इस सत्र में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा कई मुद्दों का मौके पर ही समाधान किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य प्रशासन को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया जाएगा। सीएमओ, बीएमओ और एमएस को अधिक वित्तीय अधिकार दिए जाएंगे और नियमों को सरल बनाया जाएगा। अस्पतालों की स्वच्छता से जुड़े निर्णयों की शक्तियां भी सीएमओ को सौंपी जाएंगी, साथ ही एमएस और सीएमओ के लिए विशेष निधि का प्रावधान किया जाएगा।
उन्होंने जानकारी दी कि 236 चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया जारी है और 150 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। जॉब ट्रेनी डॉक्टरों के वेतन में बढ़ोतरी पर भी सरकार विचार कर रही है। भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों के अंकों को अंतिम परिणाम में शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान विकसित किए जा रहे हैं, जहां 15 वर्ष पुराने उपकरण बदले जाएंगे और सभी संस्थानों में ऑपरेशन थिएटर की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक्स-सर्विसमैन कॉर्पोरेशन के माध्यम से सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।
चिकित्सा सेवाओं में आधुनिक तकनीक को शामिल करते हुए रोबोटिक सर्जरी और स्मार्ट लैब की शुरुआत की जा रही है। चमियाणा और टांडा अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो चुकी है, जहां अब तक 120 सफल सर्जरी की जा चुकी हैं। जल्द ही यह सुविधा नेरचौक और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में भी उपलब्ध होगी। स्मार्ट लैब के लिए 75 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जहां एक ही ब्लड सैंपल से सभी जरूरी जांच संभव होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिम केयर योजना को और प्रभावी बनाने के लिए इसका ऑडिट कराया जा रहा है तथा चिकित्सा अधीक्षकों को 100 हिम केयर कार्ड जारी करने की शक्तियां दी जाएंगी। उन्होंने चिकित्सकों से मरीजों के प्रति संवेदनशील और सौम्य व्यवहार अपनाने का भी आग्रह किया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है और आने वाले वर्षों में धन की कमी विकास में बाधा नहीं बनेगी। संवाद सत्र में कई मंत्री, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।











