शिमला,12 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Himachal Desk: शिमला के बहुचर्चित युग ह/त्याकांड मामले में पीड़ित परिवार ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी है। युग के पिता विनोद गुप्ता ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया है।
23 सितंबर को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए प्रमुख आरोपी तेजिंद्र पाल को बरी कर दिया, जबकि दो अन्य दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया। विनोद गुप्ता ने कहा कि युग की हत्या में जिस आरोपी की सबसे अधिक संलिप्तता थी, उसे ही बरी कर दिया गया है।
मामला 14 जून 2014 का है, जब राम बाजार निवासी विनोद गुप्ता के चार वर्षीय बेटे युग का अपहरण हुआ था। सीआईडी की जांच में सामने आया कि आरोपी युग को राम चंद्रा चौक के पास किराये के मकान में ले गए और हफ्तों तक उसे यातनाएं दीं। इसके बाद आरोपी उसे भराड़ी के नगर निगम पेयजल टैंक में फेंककर हत्या कर दी।
22 अगस्त 2016 को विक्रांत बख्शी की निशानदेही पर टैंक से युग की हड्डियां बरामद हुईं। इसके बाद चंद्र शर्मा और तेजिंद्र पाल को गिरफ्तार किया गया और 25 अक्टूबर 2016 को चार्जशीट पेश की गई। जिला अदालत ने 5 सितंबर 2018 को तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है।













