09 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: भारतीय शेयर बाजार के नियामक Securities and Exchange Board of India (सेबी) ने निवेशकों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के अनुसार अब एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी म्यूचुअल फंड अपने पोर्टफोलियो का अधिकतम 35% हिस्सा सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में भी निवेश कर सकेंगे। पहले इक्विटी फंड मुख्य रूप से कंपनियों के शेयरों में ही निवेश करते थे, जबकि बची हुई राशि नकद या ऋण साधनों में रखी जाती थी। इस बदलाव का उद्देश्य बाजार में उतार-चढ़ाव के समय निवेशकों के पोर्टफोलियो को बेहतर संतुलन और सुरक्षा देना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोना और चांदी आम तौर पर शेयर बाजार से अलग दिशा में चलते हैं, इसलिए बाजार गिरने की स्थिति में यह निवेश एक तरह के ‘सुरक्षा कवच’ का काम कर सकता है। इससे फंड मैनेजरों को पोर्टफोलियो को संतुलित रखने का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। हालांकि इस बदलाव से इक्विटी फंड का मूल स्वरूप नहीं बदलेगा और उनका मुख्य निवेश शेयर बाजार में ही रहेगा।
वहीं विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि निवेशकों को अपने पूरे पोर्टफोलियो पर नजर रखनी चाहिए। आज कई लोग पहले से ही गोल्ड ईटीएफ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या भौतिक सोने में निवेश करते हैं। अगर म्यूचुअल फंड भी सोने-चांदी में निवेश करेंगे तो कुल पोर्टफोलियो में इन धातुओं की हिस्सेदारी जरूरत से ज्यादा हो सकती है, जिसे ‘पोर्टफोलियो ओवरलैपिंग’ कहा जाता है।
कमोडिटी निवेश के अपने जोखिम भी होते हैं, क्योंकि सोना और चांदी की कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था, मुद्रा विनिमय दर और भू-राजनीतिक घटनाओं से तेजी से प्रभावित होती हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि फंड मैनेजर इस सीमा का इस्तेमाल केवल अस्थिर बाजार परिस्थितियों में ही करेंगे। इसलिए निवेशकों के लिए जोखिम सीमित रहेगा और इक्विटी फंड का दीर्घकालिक लक्ष्य शेयरों से बेहतर रिटर्न हासिल करना ही रहेगा।













