बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ता कहर: 24 घंटे में दो हिंदुओं की हत्या, 18 दिन में 6 की जान गई

06 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। बीते 24 घंटे में दो हिंदू युवकों की ह/त्या ने देश की कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात यह हैं कि पिछले 18 दिनों में 6 हिंदुओं की जान जा चुकी है, जिससे देश में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

सोमवार रात नरसिंदी जिले में 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि की ह/त्या कर दी गई। वह चारसिंदुर बाजार में किराने की दुकान चलाते थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने दुकान पर ही उन पर धारदार हथियारों से हमला किया। गंभीर रूप से घायल मणि को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

सादा जीवन, कोई विवाद नहीं

मणि की पत्नी अंतरा मुखर्जी गृहिणी हैं और उनका एक 12 साल का बेटा है। परिवार के अनुसार, मणि कुछ साल पहले साउथ कोरिया से लौटे थे और शांत जीवन जीते थे। उनका किसी से कोई विवाद नहीं था, जिससे हत्या की वजह और भी संदिग्ध हो जाती है।

उसी दिन पत्रकार की भी ह/त्या

इसी दिन जशोर जिले के मणिरामपुर में हिंदू पत्रकार राणा प्रताप बैरागी (45) की भी नृशंस हत्या कर दी गई। वे एक आइस फैक्ट्री के मालिक और बीडी खबर के कार्यकारी संपादक थे। पुलिस के मुताबिक, हमलावर बाइक पर आए, राणा को फैक्ट्री से बाहर बुलाया और सिर में कई गोलियां मारने के बाद गला रेत दिया, फिर फरार हो गए। घटनास्थल से 7 खाली कारतूस बरामद किए गए हैं।

मणिरामपुर थाने के प्रभारी मोहम्मद रजिउल्लाह खान ने बताया कि हमला शाम करीब 6 बजे हुआ। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और आरोपियों की तलाश जारी है।

18 दिन में 6 ह/त्याएं

बीते कुछ हफ्तों में अल्पसंख्यकों पर हमलों की कड़ी तेज हो गई है।

  • मयमनसिंह में दीपु चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी और शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी।

  • पिछले हफ्ते केहरभांगा बाजार में 50 वर्षीय दवा दुकानदार खोकन दास पर हमला हुआ, जिनकी बाद में मौत हो गई।

  • इसी तरह मयमनसिंह में ही गारमेंट फैक्ट्री कर्मचारी बजेंद्र बिस्वास की ड्यूटी के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब सरकार की कार्रवाई और जवाबदेही पर टिकी हैं।