30 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: Reserve Bank of India (RBI) ने डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2026 से देशभर में हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि अब सिर्फ OTP डालकर पेमेंट पूरा नहीं होगा, बल्कि एक अतिरिक्त सुरक्षा जांच भी जरूरी होगी, जिससे यूजर्स के पैसे की सुरक्षा पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगी।
क्या है 2FA और कैसे करेगा काम?
2FA यानी टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आपकी पहचान दो अलग-अलग तरीकों से सत्यापित की जाती है। इसमें कुछ ऐसा शामिल होता है जो आपके पास हो (जैसे मोबाइल), कुछ ऐसा जो आप जानते हों (जैसे PIN या पासवर्ड), और कुछ ऐसा जो आप खुद हों (जैसे फिंगरप्रिंट या फेस आईडी)। नए नियम के तहत पेमेंट करते समय OTP के साथ-साथ इन अतिरिक्त तरीकों में से किसी एक का इस्तेमाल करना पड़ सकता है, जिससे सुरक्षा की एक और परत जुड़ जाएगी।
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?
इस बदलाव के बाद ऑनलाइन पेमेंट करते समय थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है क्योंकि एक अतिरिक्त स्टेप पूरा करना होगा। लेकिन इसके बदले में यूजर्स को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी। हर ट्रांजैक्शन के लिए दूसरा फैक्टर अलग होगा, जिससे अगर कोई एक जानकारी चोरी भी हो जाए, तो भी अकाउंट सुरक्षित रहेगा।
फ्रॉड होने पर किसकी होगी जिम्मेदारी?
RBI ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर किसी बैंक या पेमेंट कंपनी की लापरवाही से फ्रॉड होता है, तो उसकी जिम्मेदारी उसी संस्था की होगी। ऐसे मामलों में यूजर को पूरा मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन के लिए भी अक्टूबर 2026 तक और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की योजना है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, RBI का यह कदम डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव है। भले ही यूजर्स को थोड़ा अतिरिक्त समय देना पड़े, लेकिन इसके बदले में उनका पैसा पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित रहेगा।










