पुतिन का भारत दौरा: दो दिनों में मिली कूटनीतिक बढ़त, चार साल बाद अंतरराष्ट्रीय छवि को बड़ी मजबूती

पुतिन का भारत दौरा: दो दिनों में मिली कूटनीतिक बढ़त, चार साल बाद अंतरराष्ट्रीय छवि को बड़ी मजबूती

06 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk:  रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जब अमेरिका और यूरोप लगातार रूस को अंतरराष्ट्रीय मंच से अलग-थलग करने की कोशिशें कर रहे हैं, ऐसे समय में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दो दिन का भारत दौरा रूस के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत साबित हुआ। यह यात्रा सिर्फ रणनीतिक बैठकें नहीं थी, बल्कि चार साल में खोई वैश्विक स्वीकार्यता को फिर से हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर बन गई।

पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस वित्तीय प्रणाली से लगभग कट चुका है, इसी वजह से पुतिन के साथ कई रूसी बैंकों के प्रमुख भारत आए। दोनों देशों ने वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था, स्थानीय मुद्रा में व्यापार और 2030 तक आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया। भारत रूस के लिए एक स्थिर और बड़ा बाजार है, इसलिए यह साझेदारी उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से दूर रहे, जिससे उनकी वैश्विक छवि कमजोर हुई। लेकिन भारत में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एयरपोर्ट जाकर स्वागत करना, निजी डिनर और राष्ट्रपति भवन में भव्य रिसेप्शन—इन सबने स्पष्ट संदेश दिया कि रूस अभी भी भारत का रणनीतिक साझेदार है। इससे पुतिन की अंतरराष्ट्रीय छवि को नई ऊर्जा मिली।

पुतिन का राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना भी एक मजबूत कूटनीतिक संकेत था। शांति का संदेश गांधी की समाधि से देना रूस के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक छवि बनाने का प्रयास माना गया।

भारत और रूस द्वारा तैयार किया गया 2030 आर्थिक रोडमैप ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, बैंकिंग, अंतरिक्ष और समुद्री गलियारों में साझेदारी को नई दिशा देगा। जबकि यूरोप रूस के खिलाफ सैन्य तैयारी बढ़ा रहा है, रूस ने भारत के माध्यम से आर्थिक और सामरिक संतुलन कायम करने की कोशिश की है।

सिर्फ दो दिनों में पुतिन ने स्पष्ट कर दिया कि रूस ना तो अलग-थलग पड़ा है और ना ही उसकी भूमिका वैश्विक राजनीति में खत्म हुई है। यह दौरा रूस के नेतृत्व के लिए मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक राहत लाया है, जिससे पुतिन आने वाले समय में पश्चिमी दबावों का और मजबूती से सामना कर सकेंगे।