लुधियाना, 01 अक्टूबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Punjab Desk : कनाडा में निवासरत वरिष्ठ पंजाबी लेखिका और कॉलम लेखक इंदरजीत कौर सिद्धू का आज निधन हो गया। यह जानकारी वैंकूवर विचार मंच के प्रतिनिधि मोहन गिल और अंगरेज़ ब्राड़ ने दी।
इंदरजीत कौर सिद्धू के निधन पर पंजाबी लोक विरासत अकादमी, लुधियाना के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सिद्धू साहिबा एक समर्पित और साहसी लेखिका थीं, जिनकी बेबाक टिप्पणियाँ हमेशा लेखक समुदाय में सराही जाती थीं।
प्रो. गिल ने आगे कहा कि हाल ही में लेखक नदीम परमार, चित्रकार जर्नैल सिंह, कवि और चिंतक हरजीत दौधरिया, प्रसिद्ध विद्वान प्रो. गुरमीत सिंह तिवाना, कवि महिंदर सूमल और अब इंदरजीत कौर सिद्धू के निधन से ब्रिटिश कोलंबिया को बड़ा साहित्यिक क्षति पहुँची है।
सिद्धू के सहयोगी सुरजीत माधोपुरी ने बताया कि इंदरजीत कौर सिद्धू अब तक पंद्रह से अधिक पुस्तकें लिख चुकी थीं, जिनमें कविताएँ, कहानियाँ और वार्तिक सामग्री शामिल हैं। वे नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी राइटर्स एसोसिएशन की सदस्य थीं। इसके अलावा, वे रेडियो पर टॉक शो करती थीं और इंडो-कनाडियन टाइम्स अखबार में कॉलम भी लिखती थीं।
मोहन गिल ने बताया कि इंदरजीत कौर सिद्धू की प्रमुख पुस्तकें इस प्रकार हैं:
महिक दी भुख (कहानियाँ)
तपस्या (कहानियाँ)
कर्म (कहानी संग्रह)
तन-मन (कविता)
अणहाणी ही हुई (कविता)
होनी तो अणहाणी तक (कविता)
नंगे पैर (कविता)
खिलाअ में दस्तक (कविता)
कंध ते रिश्ता (कहानियाँ)
चिड़ियों उड़ गईयाँ (कहानियाँ)
होनी अणहाणी तो बाद (कविता)
ना सड़कां ना दायरे (आत्मकथा)
इह वी इतिहास ही है (वार्तिक)
इंदरजीत कौर सिद्धू की लेखनी ने पंजाबी साहित्य को समृद्ध किया और वे अपने बेबाक दृष्टिकोण के लिए हमेशा याद की जाएँगी।













