Pongal 2026: पोंगल पर दूध और चावल क्यों उबाले जाते हैं – जानिए इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

15 January 2026 Fact Recorder

Rashifal Desk:  पोंगल दक्षिण भारत का प्रमुख सूर्य पूजा और कृषि पर्व है, जो इस बार 14-17 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस पर्व की सबसे खास परंपरा है दूध और चावल का ‘उफान’ आना, जिसे सिर्फ खाना पकाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समृद्धि, आशीर्वाद और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

पोंगल का उफान और आध्यात्मिक महत्व

पोंगल पकाते समय जैसे ही दूध उबलता है और चावल उसके साथ फूटता है, इसे पोंगल का उफान कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार:

  • यह घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाने का संकेत है।

  • वैदिक परंपरा में इसे सूर्य देव के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।

  • उफान के समय मंत्रों का उच्चारण इसे आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता से भर देता है।

  • परिवार में सभी सदस्य (बच्चे, बुजुर्ग और अन्य) मिलकर इस प्रक्रिया में शामिल होकर साथीभाव, सहयोग और एकता का अनुभव करते हैं।

मुख्य मंत्र:
“पोंगल: पोंगतु, सूर्य देवस्य आशीर्वादेन अस्माभिः लाभः स्यात्”
— जिसका अर्थ है: “पोंगल पकाओ, सूर्य देव के आशीर्वाद से हमें लाभ प्राप्त हो।”

धार्मिक और सामाजिक महत्व

  • पोंगल का यह उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समारोह भी है।

  • बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्यों की सहभागिता पारिवारिक बंधन मजबूत करती है।

  • यह सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।

स्वास्थ्य और प्राकृतिक लाभ

  • दूध ऊर्जा और प्रोटीन का स्रोत है।

  • चावल में आवश्यक कार्बोहाइड्रेट और पोषक तत्व मौजूद हैं।

  • यह संयोजन हल्का, सुपाच्य और सात्विक भोजन बनाता है, जो सर्दियों में विशेष रूप से लाभकारी है।

  • पारंपरिक सात्विक सामग्री से पोंगल बनाने से शरीर में ऊर्जा और मानसिक स्थिरता बनी रहती है।

पोंगल का सबसे महत्वपूर्ण पल

  • दूध-चावल का उफान पर्व का सबसे रोमांचक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण पल है।

  • यह सिर्फ भोजन पकने का संकेत नहीं, बल्कि सूर्य देव की कृपा और घर में समृद्धि का प्रतीक है।

  • पूरे परिवार की सहभागिता इसे धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और स्वास्थ्य दृष्टि से पूर्ण उत्सव में बदल देती है।