19 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: गाजा संकट को लेकर पाकिस्तान ने अपना रुख साफ कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा शांति योजना (Gaza Peace Plan) का समर्थन करेगा। यह बयान अमेरिका में होने वाली गाजा पीस बोर्ड की अहम बैठक से ठीक पहले आया है।
इशाक डार ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा हालात में सबसे बड़ी प्राथमिकता गाजा का पुनर्निर्माण और वहां के नागरिकों तक मानवीय सहायता पहुंचाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान शांति और स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के साथ खड़ा है।
इज़राइल पर भी जताई आपत्ति
हालांकि अमेरिका की योजना का समर्थन करते हुए भी पाकिस्तान ने इज़राइल पर तीखी टिप्पणी की। इशाक डार ने कहा कि वेस्ट बैंक में इज़राइल की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और युद्धविराम का बार-बार हनन किया जा रहा है। पाकिस्तान ने दोहराया कि फिलिस्तीन के मुद्दे पर उसका रुख पहले जैसा ही स्पष्ट और मजबूत है।
क्या है गाजा पीस प्लान?
अमेरिका ने गाजा को लेकर 20 सूत्रीय रोडमैप पेश किया है, जिसके दूसरे चरण को लागू करने के लिए गाजा पीस बोर्ड बनाया गया है। इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में शासन व्यवस्था, पुनर्निर्माण, निवेश, फंड जुटाने और क्षेत्रीय सहयोग की निगरानी करना है।
योजना के केंद्र में एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (International Stabilization Force) का प्रस्ताव है, जो हथियारों की वापसी, सुरक्षा व्यवस्था और राहत सामग्री की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। यही बिंदु कई देशों के लिए संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसमें जमीनी सैन्य भूमिका की संभावना भी शामिल है।
अमेरिका में बैठक, शहबाज शरीफ होंगे शामिल
गाजा पीस बोर्ड की अहम बैठक अमेरिका में होने जा रही है, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी हिस्सा लेंगे। व्हाइट हाउस के अनुसार, बैठक की मेजबानी राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे। इसमें 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे और सदस्य देशों की ओर से 5 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता राशि की घोषणा हो सकती है।
इस बोर्ड में पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब, कतर, तुर्किए, जॉर्डन, यूएई, बहरीन और मोरक्को जैसे देश भी शामिल हैं।
क्या गाजा में जाएंगे पाकिस्तानी सैनिक?
हालांकि योजना का समर्थन करना एक बात है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल के तहत जमीनी तैनाती का सवाल उठा, तो यह पाकिस्तान के लिए घरेलू राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। पाकिस्तान इज़राइल को मान्यता नहीं देता और फिलिस्तीन का मुद्दा वहां बेहद संवेदनशील है। ऐसे में किसी अमेरिकी समर्थित योजना के तहत पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती देश के भीतर विरोध को जन्म दे सकती है।
फिलहाल पाकिस्तान ने शांति योजना के समर्थन का ऐलान जरूर किया है, लेकिन आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह समर्थन कूटनीतिक स्तर तक सीमित रहता है या जमीन पर इसकी भूमिका भी तय होती है।













