28 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 2 करोड़ से ज्यादा आधार नंबर निष्क्रिय कर दिए हैं। ये सभी आधार नंबर उन व्यक्तियों के थे जिनका निधन हो चुका है। UIDAI ने बताया कि मृत व्यक्तियों के आधार नंबरों के गलत उपयोग और धोखाधड़ी की आशंका को रोकने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक था, ताकि आधार डेटाबेस की शुद्धता और विश्वसनीयता बनी रहे। संस्था ने यह भी कहा कि मृतक व्यक्तियों का डेटा अब भी एकत्र किया जा रहा है और आगे भी और आधार नंबर डी-एक्टिवेट किए जाएंगे।
कैसे जुटाया गया मृ/त व्यक्तियों का डेटा?
UIDAI द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रव्यापी सफाई अभियान के तहत भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI), राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम तथा अन्य सरकारी स्रोतों से मृत व्यक्तियों का डेटा प्राप्त किया गया है। अब UIDAI वित्तीय संस्थानों और अन्य संगठनों से भी अतिरिक्त जानकारी जुटाने पर कार्य कर रहा है।
UIDAI ने स्पष्ट किया कि किसी भी आधार नंबर को कभी भी दोबारा आवंटित नहीं किया जाता। इसलिए मृत्यु के बाद संभावित पहचान धोखाधड़ी या लाभों के अनधिकृत उपयोग को रोकने के लिए आधार नंबर को डी-एक्टिवेट करना आवश्यक है।
परिवार भी दे सकते हैं मृ/त्यु की सूचना
UIDAI ने बताया कि इस वर्ष की शुरुआत में एक नई सुविधा शुरू की गई है जिसके तहत परिवार के सदस्य अपने दिवंगत परिजन की मृत्यु की सूचना myAadhaar पोर्टल के माध्यम से दे सकते हैं। वर्तमान में यह सुविधा नागरिक पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System) से जुड़े 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध है। शेष राज्यों में पोर्टल इंटीग्रेशन की प्रक्रिया जारी है।
UIDAI के इस अभियान से आधार डेटाबेस की पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।













