सोम प्रदोष व्रत पर ऐसे करें शिव-पार्वती की पूजा, पूरी होंगी आपकी सभी मनोकामनाएं!

22 जून 2025 फैक्टर रिकॉर्डर

 Rashifal Desk: सोम प्रदोष व्रत: जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व, पूरी होंगी मनोकामनाएं                 हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक अत्यंत पावन और फलदायी व्रत माना जाता है। यह व्रत हर माह के दोनों पक्षों—कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष—की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। ‘प्रदोष’ का अर्थ है सूर्यास्त के बाद का वह संधिकाल, जब दिन और रात आपस में मिलते हैं। मान्यता है कि इस विशेष समय में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं और देवगण उनकी स्तुति करते हैं। इसीलिए इस समय की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

इस बार सोम प्रदोष व्रत की तिथि और समय
इस बार प्रदोष व्रत सोमवार, 23 जून 2025 को पड़ रहा है, जिसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 23 जून को सुबह 7:37 बजे शुरू होकर 24 जून को सुबह 9:33 बजे तक रहेगी। पूजा का श्रेष्ठ समय, यानी प्रदोष काल, 23 जून की शाम 7:37 बजे से रात 9:33 बजे तक रहेगा। यह समय शिव-पार्वती की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रातः काल की तैयारी:

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें कि आप दिनभर व्रत रखेंगे और प्रदोष काल में भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करेंगे।

शिवलिंग की पूजा:

घर या मंदिर में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, धूप-दीप आदि अर्पित करें।

पूरे दिन निराहार रहें, या फलाहार लें जिसमें अनाज और नमक वर्जित हो।

प्रदोष काल की विशेष पूजा:

सूर्यास्त से पूर्व फिर से स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।

गाय के गोबर से मंडप बनाएं और रंगोली सजाएं (यदि संभव हो)।

भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।

अभिषेक और अर्पण:

शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहें।

शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, शमी पत्र, चंदन और भस्म अर्पित करें।

माता पार्वती को लाल वस्त्र, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां आदि सुहाग सामग्री अर्पित करें।

व्रत का पारण (24 जून को)
प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन यानी 24 जून को सूर्योदय के बाद करें। इस दिन भगवान की पूजा करके किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं या यथासंभव दान दें। इसके बाद स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत पूर्ण करें।

सोम प्रदोष व्रत का महत्व
सोम प्रदोष व्रत का संबंध चंद्रमा से होता है, इसलिए यह व्रत चंद्र दोष को शांत करने वाला माना जाता है। इससे मानसिक शांति, भावनात्मक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। यह व्रत संतान सुख की प्राप्ति, रोग निवारण और जीवन में समृद्धि के लिए भी अत्यंत शुभ होता है।

श्रद्धा और निष्ठा से किया गया सोम प्रदोष व्रत भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है और भगवान शिव तथा माता पार्वती की कृपा से परिवार में सुख-शांति और स्वास्थ्य बना रहता है।

नोट: प्रदोष व्रत सरल लेकिन प्रभावशाली उपासना पद्धति है, जो हर जाति, वर्ग और आयु के व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है।