अमेरिका के नए टैरिफ से हड़कंप, भारत से भेजा जाने वाला अरबों का माल व्यापारियों ने रोका

24 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk: अमेरिका में आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर मची अनिश्चितता ने भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी और सीफूड सेक्टर से जुड़े कई व्यापारियों ने अमेरिका जाने वाली शिपमेंट फिलहाल रोक दी है। जब तक नए टैक्स नियमों पर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक कारोबारी कोई जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं।

कोर्ट के फैसले के बाद बदला माहौल

पूरा मामला तब उलझा जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत लगाए गए पुराने टैरिफ को खारिज कर दिया। इससे पहले से लागू व्यापारिक व्यवस्थाओं की वैधता पर सवाल खड़े हो गए।
हालांकि, कुछ ही घंटों बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 के तहत नया ग्लोबल टैरिफ लागू करने का ऐलान कर दिया। पहले इसकी दर 10 प्रतिशत बताई गई, जिसे अगले ही दिन बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया।

सीफूड और ज्वेलरी सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर

इस अनिश्चितता का सबसे गहरा असर सीफूड और जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग पर पड़ा है। सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुंटूरू पवन कुमार के अनुसार, अमेरिकी खरीदारों के निर्देश पर झींगा निर्यातकों ने शिपमेंट रोक दी है। ड्यूटी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है और सबकी नजर कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन की वेबसाइट पर है, जहां से आधिकारिक अपडेट आने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा झींगा बाजार है और बीते वित्त वर्ष में इसका निर्यात करीब 2.4 बिलियन डॉलर रहा।

दूसरी ओर, लगभग 10 बिलियन डॉलर के निर्यात वाले जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर ने भी कम से कम एक हफ्ते के लिए सप्लाई रोक दी है। उद्योग का मानना है कि हीरे के कारोबार में भारत की मजबूत पकड़ के चलते अगर दरें स्थिर रहती हैं तो नुकसान सीमित हो सकता है, लेकिन फिलहाल सब ट्रंप की अगली चाल का इंतजार कर रहे हैं।

टेक्सटाइल सेक्टर की बढ़ी चिंता

टेक्सटाइल उद्योग भी इस हालात को लेकर बेहद सतर्क है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नए टैरिफ ने हालिया व्यापार समझौतों से मिले प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को लगभग खत्म कर दिया है। क्लॉथिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चीफ मेंटर राहुल मेहता का कहना है कि व्यापार मुश्किल परिस्थितियों में भी चल सकता है, लेकिन लगातार बनी अनिश्चितता में टिके रहना बेहद कठिन हो जाता है।

कुल मिलाकर, अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर असमंजस की स्थिति ने भारतीय निर्यातकों को ‘वेट एंड वॉच’ मोड में डाल दिया है, जहां अरबों रुपये का तैयार माल गोदामों में ही रुका हुआ है।