गाजा पुनर्निर्माण की नई पहल: ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में भारत को आमंत्रण, जानिए पूरी योजना

19 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk:  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण और शासन व्यवस्था को संभालने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गठित किया है। इस बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत को भी आमंत्रण भेजा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले इस न्योते को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

इजराइल और हमास के बीच 2023 से चला आ रहा युद्ध गाजा के लिए विनाशकारी साबित हुआ। लगातार हमलों, बमबारी और मिसाइल स्ट्राइक से पूरा इलाका खंडहर में बदल गया। हजारों लोगों की जान गई और बड़ी आबादी भुखमरी व कुपोषण की चपेट में आ गई। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने 20 प्वाइंट पीस डील पेश की, जिसके बाद युद्धविराम लागू हुआ। अब इस सीजफायर के बाद गाजा को दोबारा बसाने और वहां स्थिर शासन व्यवस्था कायम करने के लिए बोर्ड ऑफ पीस का गठन किया गया है।

क्या है बोर्ड ऑफ पीस?

बोर्ड ऑफ पीस को एक अंतरराष्ट्रीय संगठन और अस्थायी प्रशासनिक ढांचे के रूप में तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य गाजा में हथियारों से मुक्ति, मानवीय सहायता की सुचारु आपूर्ति, तबाह हो चुके बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण और एक तकनीकी फिलिस्तीनी प्रशासन की स्थापना करना है। ट्रंप के मुताबिक, यह पहल गाजा में स्थायी शांति और आर्थिक स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम है।

कौन होगा बोर्ड का अध्यक्ष?

व्हाइट हाउस के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस की अध्यक्षता खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। यह बोर्ड युद्ध के बाद गाजा में होने वाले सभी बड़े बदलावों की निगरानी करेगा। साथ ही, निवेश जुटाने, शासन सुधारने और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर फोकस करेगा।

कौन-कौन हैं परमानेंट सदस्य?

बोर्ड के स्थायी सदस्यों में कई प्रभावशाली वैश्विक हस्तियां शामिल हैं, जिनमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जैरेड कुश्नर, अरबपति कारोबारी मार्क रोवन, विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और अमेरिका के उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल जूनियर शामिल हैं।

क्या है NCAG?

मुख्य बोर्ड के साथ गाजा प्रशासन के लिए नेशनल कमेटी फॉर गाजा (NCAG) भी बनाई गई है। इसकी अगुवाई फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट डॉ. अली शाथ करेंगे। यह समिति सार्वजनिक सेवाओं की बहाली, सरकारी संस्थानों के पुनर्गठन और आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी को सामान्य बनाने का काम करेगी। इस 12 सदस्यीय समिति में आर्थिक, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, न्याय और आंतरिक सुरक्षा जैसे अहम विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनेगा

इसके अलावा एक अलग गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो जमीन पर शासन व्यवस्था लागू करने में मदद करेगा। इसमें तुर्की, कतर, मिस्र, इजराइल और यूएई के प्रतिनिधि शामिल होंगे। संयुक्त राष्ट्र की मानवीय प्रतिनिधि सिग्रिड काग भी इस बोर्ड का हिस्सा होंगी।

किन देशों को मिला न्योता?

भारत के अलावा अर्जेंटीना, कनाडा, मिस्र, तुर्की, अल्बानिया, साइप्रस और पाकिस्तान सहित कई देशों को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी न्योता मिलने की पुष्टि की है और गाजा में शांति प्रयासों के समर्थन की बात कही है।

परमानेंट सदस्यता की कीमत

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन चाहता है कि बोर्ड के स्थायी सदस्य बनने के लिए देशों को 1 अरब डॉलर (करीब 9 हजार करोड़ रुपये) का योगदान देना होगा। बोर्ड का कार्यकाल तीन साल का होगा, लेकिन चार्टर लागू होने के पहले साल में यह राशि देने पर स्थायी सदस्यता मिल सकती है। हालांकि, बोर्ड में शामिल होने के लिए कोई अनिवार्य फीस नहीं है, यह राशि केवल परमानेंट सदस्यता के लिए तय की गई है।

कुल मिलाकर, बोर्ड ऑफ पीस को गाजा के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक अहम वैश्विक मंच माना जा रहा है, जिसमें भारत की संभावित भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास महत्व रखती है।