नेपाल सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सरकार को 2007 गौर नरसंहार की दोबारा जांच के आदेश

Nepal Supreme Court's big decision

19 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk: नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के गौर नरसंहार मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना में 27 लोगों की मौत हुई थी और करीब सौ लोग घायल हुए थे। यह हिंसक झड़प मधेशी जन अधिकार मंच (एमपीआरएफ) और माओवादी कार्यकर्ताओं के बीच रौतहट जिले के गौर स्थित राइस मिल मैदान में हुई थी। अदालत के आदेश के बाद अब 113 आरोपियों, जिनमें मंच के नेता उपेंद्र यादव भी शामिल हैं, के खिलाफ फिर से जांच शुरू की गई है।  सोमवार को जस्टिस तिल प्रसाद श्रेष्ठ और जस्टिस नित्यानंद पांडे की बेंच ने सरकार को मैंडमस जारी करते हुए कहा कि हत्याओं से संबंधित सभी शिकायतों की जांच अनिवार्य है। यह याचिका त्रिभुवन साह और अन्य ने जून 2023 में रौतहट जिला पुलिस और जिला सरकारी वकील कार्यालय के खिलाफ दायर की थी।

मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना योजनाबद्ध थी और इसमें मुख्य रूप से मधेशी जन अधिकार मंच के कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया कि पीड़ितों को पकड़कर पीटा गया, धारदार हथियारों से हमला किया गया और कई की हत्या कर शव फेंक दिए गए। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अपराध करार दिया।

इस नरसंहार के पीछे चार प्रमुख कारण बताए गए—

  1. जनवरी 2007 में गौर में माओवादियों द्वारा मंच समर्थकों पर हमला, जिससे बदले की भावना पैदा हुई।

  2. मंच ने अपने कार्यक्रम की पूर्व सूचना दी, लेकिन माओवादी सहयोगी संगठन ने उसी स्थल पर पहले ही कार्यक्रम रखकर टकराव की स्थिति बनाई।

  3. स्थानीय व्यापार संघ और प्रशासन ने कार्यक्रम अलग-अलग करने की अपील की, लेकिन दोनों पक्षों ने अनसुनी की।

  4. सुरक्षा बल की समय पर तैनाती न होने से हिंसा को रोका नहीं जा सका।

यह घटना उस दौर में हुई थी जब माओवादी राजनीति में प्रवेश कर रहे थे। उस समय पार्टी अध्यक्ष प्रचंड ने हिंसा के लिए राजशाही समर्थकों, विदेशी ताकतों और भारतीय चरमपंथियों को जिम्मेदार ठहराया था। वहीं, झड़प के बाद एमपीआरएफ नेता उपेंद्र यादव भूमिगत हो गए थे।

👉 सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब इस मामले की दोबारा जांच तेज की जा रही है।