Mohammad Rafi: 7400 से ज्यादा गाने, फिर भी मामूली फीस… जानिए एक गीत के लिए कितने पैसे लेते थे रफी साहब

Mohammad Rafi: 7400 से ज्यादा गाने, फिर भी मामूली फीस… जानिए एक गीत के लिए कितने पैसे लेते थे रफी साहब

24 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Bollywood Desk: “चाहे कोई मुझे जंगली कहे…” जैसे अनगिनत सदाबहार गीतों से भारतीय संगीत को अमर बनाने वाले ‘सुरों के बादशाह’ मोहम्मद रफी की आज, 24 दिसंबर 2025 को 101वीं जयंती मनाई जा रही है। रफी साहब ने अपने करियर में करीब 7400 से ज्यादा गाने गाए और हर तरह की भावना—रोमांस, दर्द, भक्ति और मस्ती—को अपनी आवाज़ में जीवंत कर दिया।

हिंदी ही नहीं, बल्कि उर्दू, पंजाबी, बंगाली, मराठी, ओड़िया, मैथिली, मगही, फारसी, अरबी और इंग्लिश जैसी कई भाषाओं में गाने गाने वाले रफी साहब को लेकर एक दिलचस्प सवाल अक्सर उठता है—वो एक गाने के कितने पैसे चार्ज करते थे? और क्या उनकी फीस लता मंगेशकर से ज्यादा थी या कम?

फीस से ज्यादा संगीत को दी अहमियत

मोहम्मद रफी का मानना था कि संगीत सेवा है, सौदा नहीं। यही वजह थी कि वह अक्सर गाने की फीस पर चर्चा ही नहीं करते थे। कई बार उन्होंने बिना कोई पैसे लिए भी गाने गाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक,

  • “वो जब याद आए, बहुत याद आए”

  • “रोशन तुम्हीं से दुनिया”
    जैसे यादगार गाने उन्होंने बिल्कुल मुफ्त गाए थे।

इतना ही नहीं, कई नए और संघर्षरत संगीतकारों की मदद के लिए रफी साहब ने कुछ समय तक सिर्फ 1 रुपये फीस लेकर भी गाने गाए।

करियर के अलग-अलग दौर में कितनी रही फीस?

  • शुरुआती और संघर्ष के दौर में: कई गाने बेहद कम फीस या बिना फीस

  • 1970 के आसपास (मिड करियर): करीब 4000 रुपये प्रति गीत

  • कुछ फिल्मों में तय फीस से कम ली, यहां तक कि हजारों रुपये वापस लौटा दिए

  • करियर के पीक पर: लगभग 70,000 से 80,000 रुपये प्रति गीत

लता मंगेशकर से तुलना

जहां मोहम्मद रफी पीक पर भी 70–80 हजार रुपये लेते थे, वहीं लता मंगेशकर 80 के दशक में एक गाने के लिए 1 लाख से 3 लाख रुपये तक चार्ज करती थीं। इस तरह फीस के मामले में रफी साहब, लता दीदी से काफी पीछे थे—लेकिन यह उनकी पसंद और सोच का हिस्सा था।

सबसे ज्यादा किन कलाकारों के लिए गाए गाने?

  • शम्मी कपूर: करीब 190 गाने

  • जॉनी वॉकर: 155 गाने

  • शशि कपूर: 129 गाने

  • धर्मेंद्र: 109 गाने

मोहम्मद रफी सिर्फ एक महान गायक नहीं थे, बल्कि एक ऐसे कलाकार थे जिनके लिए इंसानियत और संगीत, पैसों से कहीं ऊपर थे। यही वजह है कि उनकी आवाज़ आज भी दिलों में जिंदा है और आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें उसी सम्मान के साथ याद करती रहेंगी।