मोदी–पुतिन की हाई-स्टेक्स मीटिंग: ट्रेड, स्पेस और डिफेंस डील्स से बदलेगा समीकरण, वॉशिंगटन में बढ़ी बेचैनी

मोदी–पुतिन की हाई-स्टेक्स मीटिंग: ट्रेड, स्पेस और डिफेंस डील्स से बदलेगा समीकरण, वॉशिंगटन में बढ़ी बेचैनी

05 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk:  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिनों की भारत यात्रा पर हैं और दुनिया की निगाहें इस अहम दौरे पर टिकी हुई हैं। अमेरिका के साथ टैरिफ तनाव और यूक्रेन युद्ध के चलते वॉशिंगटन-रूस संबंधों में खटास के बीच यह विज़िट रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 25+25% अतिरिक्त टैरिफ लगाते हुए दावा किया था कि भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद यूक्रेन संघर्ष को आर्थिक मदद देती है—हालांकि भारत ने इसे पूरी तरह खारिज किया है।

पुतिन का 2021 के बाद यह पहला भारत दौरा है। रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भारत, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के बाज़ार उसकी अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण बने हैं। इस यात्रा का मुख्य फोकस रक्षा, अंतरिक्ष, आर्थिक साझेदारी और 100 बिलियन डॉलर के ट्रेड टारगेट को हासिल करने पर है।

रक्षा सहयोग: Su-57 जॉइंट प्रोडक्शन पर फोकस
सुखोई Su-57 फाइटर जेट के संयुक्त उत्पादन पर बातचीत एजेंडा में शीर्ष पर है। एयर, नेवल और मिसाइल क्षमताओं में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। रूस की संसद ने हाल ही में एक सैन्य सहयोग समझौते को मंज़ूरी दी है, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे की भूमि पर कानूनी तौर पर सैनिक व उपकरण तैनात कर सकेंगे।

स्पेस सेक्टर में नई उड़ान
रोस्कोस्मोस भारत के साथ इंजन, रॉकेट फ्यूल, मानवयुक्त मिशन और नेशनल ऑर्बिटल स्टेशन के विकास में साझेदारी बढ़ाने जा रहा है। 1960 के दशक से चली आ रही यह पार्टनरशिप गगनयान मिशन के साथ नई ऊंचाई पर पहुंचेगी।

आर्थिक साझेदारी: डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति
दोनों देश मीर–रूपे कार्ड कनेक्शन और जल्द ही एसबीपी–यूपीआई लिंकिंग पर काम कर रहे हैं। 90% से अधिक व्यापार अब रुपये–रूबल में हो रहा है। रूस ने भारत के साथ आर्थिक साझेदारी को और गहरा करने की इच्छा व्यक्त की है।

ट्रेड बैलेंस सुधारने की कोशिश
भारत रूस से 64 बिलियन डॉलर का आयात करता है जबकि सिर्फ 5 बिलियन का निर्यात—यह बड़ा असंतुलन दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है। पुतिन ने आश्वासन दिया है कि उनकी सरकार इस गैप को कम करने के लिए प्रैक्टिव तरीके से काम करेगी।

रिश्तों में मजबूती का संकेत
यह यात्रा दोनों देशों के बीच वार्षिक उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन की परंपरा की वापसी भी है। भारत ने हाल ही में रूस के कजान और येकातेरिनबर्ग में नए दूतावास खोले हैं, जो कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।
वैश्विक मायने
यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंध, टैरिफ तनाव और अमेरिकी बाज़ार में भारतीय निर्यात की गिरावट—इन सबके बीच मॉस्को और नई दिल्ली को अपने रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए एक नाजुक कूटनीतिक संतुलन साधना होगा।