23 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: सैटेलाइट टेलीकम्युनिकेशन की दुनिया में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो जल्द ही लोग उन इलाकों से भी मोबाइल कॉल और इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेंगे, जहां आज तक मोबाइल टावर पहुंच ही नहीं पाए हैं। यह तकनीक दुनिया के करीब 2 अरब लोगों के लिए कम्युनिकेशन का तरीका पूरी तरह बदल सकती है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) बुधवार को Blue Bird Block-2 सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है। यह लॉन्च सुबह 8:54 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से LVM3-M6 मिशन के तहत किया जाएगा। इस सैटेलाइट की खासियत यह है कि इसके जरिए पहाड़ों की चोटियों, समुद्र के बीच, रेगिस्तान और दूरदराज के इलाकों में भी मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराया जा सकेगा।
Blue Bird Block-2, LVM3 रॉकेट का नौवां मिशन होगा और यह ISRO का 101वां लॉन्च माना जा रहा है। साल 2025 में यह भारतीय स्पेस एजेंसी का पांचवां मिशन है। ‘बाहुबली’ नाम से मशहूर LVM3 रॉकेट की भारी क्षमता के चलते इसे चुना गया है। यह मिशन न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड द्वारा मैनेज किया जा रहा तीसरा पूरी तरह कमर्शियल लॉन्च भी है।
इस सैटेलाइट को अमेरिका की कंपनी AST Space Mobile ने विकसित किया है। यह ISRO और अमेरिकी कंपनियों के बीच दूसरा बड़ा सहयोग है। इससे पहले जुलाई में ISRO ने NASA-ISRO NISAR मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। AST Space Mobile पहले ही सितंबर 2024 में BlueBird-1 से BlueBird-5 तक पांच सैटेलाइट लॉन्च कर चुकी है और अब इस नेटवर्क को और मजबूत किया जा रहा है। कंपनी ने दुनिया भर के 50 से ज्यादा मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी भी की है।
टेलीकम्युनिकेशन के क्षेत्र में इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। Blue Bird Block-2 स्पेस में जाकर मोबाइल टावर की तरह काम करेगा। ऑर्बिट में पहुंचने के बाद यह 223 स्क्वायर मीटर का विशाल फेज़्ड-एरे एंटीना तैनात करेगा, जो लो-अर्थ ऑर्बिट में अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल कम्युनिकेशन एंटीना होगा। इस सैटेलाइट का वजन करीब 6.5 टन है।
यह सैटेलाइट 120 मेगाबिट प्रति सेकंड तक की स्पीड सपोर्ट करता है, जिससे वॉयस कॉल, मैसेजिंग, डेटा ट्रांसफर और 4G-5G नेटवर्क पर वीडियो स्ट्रीमिंग भी बिना रुकावट संभव होगी। शुरुआती कवरेज अमेरिका में शुरू होगी, इसके बाद इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाया जाएगा। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों, समुद्र और हवाई यात्रा के दौरान नेटवर्क की समस्या को खत्म करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
Blue Bird Block-2 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सीधे सामान्य 4G और 5G स्मार्टफोन से कनेक्ट हो सकता है। इसके लिए न तो सैटेलाइट फोन की जरूरत होगी और न ही किसी खास एंटीना या हार्डवेयर की। यह सैटेलाइट स्पेस में एक बेहद ताकतवर सेल टावर की तरह काम करेगा।
जब कोई स्मार्टफोन मोबाइल टावर की रेंज से बाहर चला जाएगा, तो वह अपने आप BlueBird सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़ सकेगा। यूजर के लिए कॉल, मैसेज और इंटरनेट का इस्तेमाल बिल्कुल सामान्य रहेगा। फर्क सिर्फ इतना होगा कि सिग्नल जमीन पर मौजूद टावर की बजाय सैकड़ों किलोमीटर ऊपर घूम रहे सैटेलाइट तक जाएगा।
अगर यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है, तो यह दुनिया के सबसे दूरदराज इलाकों में भी डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचा सकती है। बिना मोबाइल टावर के इंटरनेट और कॉल की सुविधा मिलना भविष्य में मोबाइल कम्युनिकेशन की पूरी तस्वीर बदल सकता है।













