22 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Politics Desk: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक अखबार में प्रकाशित लेख के जरिए केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) जैसी दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना को “बुलडोजर से ध्वस्त” किया जा रहा है, जिसके दूरगामी और विनाशकारी परिणाम होंगे।
सोनिया गांधी ने बताया कि मनरेगा को वर्ष 2005 में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पहले कार्यकाल में एक अधिकार-आधारित कानून के रूप में लागू किया गया था। यह संविधान के अनुच्छेद 41 से प्रेरित था, जो नागरिकों के काम करने के अधिकार की सुरक्षा करता है। उन्होंने कहा कि व्यापक जन-परामर्श और संसद की सर्वसम्मति के बाद यह कानून बना, लेकिन मौजूदा सरकार ने बिना चर्चा और परामर्श के इसे कमजोर करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि नए कानून में रोजगार की कानूनी गारंटी को खत्म कर दिया गया है और योजना को केवल नौकरशाही प्रावधानों तक सीमित कर दिया गया है। पहले जहां काम की मांग के अनुसार धन उपलब्ध कराया जाता था, वहीं अब राज्यों के लिए पूर्व-निर्धारित बजट और सीमाएं तय कर दी गई हैं। इससे रोजगार के दिनों की संख्या लोगों की जरूरतों के बजाय केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं पर निर्भर हो गई है।
सोनिया गांधी ने कहा कि पूरे साल रोजगार की गारंटी समाप्त कर दी गई है और कृषि के चरम मौसम में 60 दिनों तक काम न देने की व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीण मजदूरों की सौदेबाजी की शक्ति कमजोर होगी और मजदूरी पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लागत-साझेदारी का अनुपात 90:10 से बदलकर 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ डाला जा रहा है और वे योजना लागू करने से हतोत्साहित होंगे।
उन्होंने इसे “घोर केंद्रीकरण” बताते हुए कहा कि ग्राम सभाओं और पंचायतों की भूमिका खत्म कर दी गई है और स्थानीय जरूरतों के बजाय केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को थोपने की कोशिश हो रही है। सोनिया गांधी ने सरकार के इस दावे को भी खारिज किया कि रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 कर दिया गया है।
लेख में उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए सबसे मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवच रहा है। इससे पलायन रुका, पंचायतें सशक्त हुईं और कोविड-19 जैसी आपदा के समय गरीबों तक राहत पहुंची। उन्होंने चेतावनी दी कि इस योजना को खत्म करने से ग्रामीण भारत के करोड़ों लोगों पर गंभीर असर पड़ेगा।
सोनिया गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा के साथ-साथ सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, वन अधिकार अधिनियम, भूमि अधिग्रहण कानून और अन्य अधिकार-आधारित कानूनों को भी कमजोर किया गया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा का समाप्त होना केवल एक योजना का अंत नहीं, बल्कि संविधान और नागरिक अधिकारों पर हो रहे हमलों का हिस्सा है। उनके मुताबिक, इसके सामाजिक, आर्थिक और मानवीय परिणाम आने वाले वर्षों तक देश को झेलने पड़ेंगे।











