25 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Chandigarh Desk: चंडीगढ़ में मेयर चुनाव से लेकर अब तक 308 दिन में सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (AAP) की पार्षद सुमन शर्मा और पूनम ने भाजपा में शामिल होकर नगर निगम में नई राजनीतिक तस्वीर पेश की है।
पूनम का मामला खासा चर्चा में रहा। फरवरी 2024 में उन्होंने भाजपा ज्वाइन किया था और मार्च में वापस आप में लौट गई थीं। अब 308 दिन में उन्होंने दूसरी बार दल बदला और इसे घर वापसी बताया। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यह फैसला अचानक नहीं बल्कि लंबे समय से तैयार की गई रणनीति का हिस्सा था। सितंबर से ही योजना बनाई गई थी। खराब सड़कों के मुद्दे और सदन में विरोध के दौरान पूनम के वार्ड में सड़क निर्माण करवाया गया, और उन्होंने खुले तौर पर मेयर हरप्रीत कौर बबला का धन्यवाद किया।
सुमन शर्मा के मामले में छठ पूजा आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भाजपा पार्षदों ने जब इसे सदन में सवाल उठाया, तो मेयर ने इसे धार्मिक कार्यक्रम बताते हुए समर्थन किया। इन घटनाओं को अब भाजपा ज्वाइनिंग से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस दल-बदल से मनोनीत पार्षद गीता चौहान की भूमिका भी जटिल हो गई है। इंदिरा कॉलोनी की पार्षद सुमन शर्मा के साथ पहले से उनका विरोध रहा है, अब पार्टी लाइन में उनका रुख राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है।
गृहमंत्री अमित शाह के पंचकूला दौरे के बीच यह ज्वाइनिंग भाजपा के लिए संदेश रही कि नगर निगम में उनका संख्या बल मजबूत हो गया है। मेयर पद की दावेदारी अब पूरी तरह संख्या बल पर निर्भर करती है। भाजपा में कंवरजीत राणा की सक्रियता और पूनम-सुमन की ज्वाइनिंग में उनकी उपस्थिति इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।











