07 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना की वेतन सीमा में संशोधन पर चार महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मौजूदा वेतन सीमा पिछले 11 वर्षों से नहीं बदली गई है।
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल की याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिका में कहा गया कि EPF योजना में 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को शामिल नहीं किया जाता, जिससे बड़ी संख्या में कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत को बताया कि कई राज्यों में न्यूनतम वेतन मौजूदा EPF सीमा से अधिक हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद वेतन सीमा में संशोधन नहीं किया गया। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि बीते दशकों में वेतन सीमा का निर्धारण महंगाई, न्यूनतम वेतन और प्रति व्यक्ति आय जैसे आर्थिक संकेतकों से मेल नहीं खाता।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार के समक्ष विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके बाद केंद्र सरकार को चार महीने के भीतर इस पर निर्णय लेना होगा। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि 2022 में EPFO की उप-समिति ने वेतन सीमा बढ़ाने की सिफारिश की थी, जिसे केंद्रीय बोर्ड ने मंजूरी दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस आदेश से उम्मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार जल्द ही EPF की वेतन सीमा में संशोधन कर लाखों कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिलाएगी।













