26 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय 31 मार्च की समयसीमा से पहले ही राज्य सरकार ने दावा किया है कि बस्तर का करीब 96 प्रतिशत इलाका अब नक्सली प्रभाव से मुक्त हो चुका है।
राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने जगदलपुर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बस्तर अब ‘लाल आतंक’ से काफी हद तक बाहर निकल चुका है और तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दस वर्षों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए बस्तर में 400 से अधिक पुलिस कैंप स्थापित किए गए थे, जिनमें बड़ी संख्या ‘फॉरवर्ड बेस कैंप’ की भी है। इनमें से 120 से ज्यादा कैंप पिछले दो वर्षों में बनाए गए हैं।
अब जब क्षेत्र में नक्सल प्रभाव काफी कम हो गया है और सीमावर्ती इलाकों में केवल 35-40 माओवादी कैडर ही सक्रिय बचे हैं, तो सरकार इन कैंपों को नई भूमिका देने की तैयारी में है। विजय शर्मा के अनुसार, इन सुरक्षा कैंपों का इस्तेमाल अब पुलिसिंग के साथ-साथ स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए किया जाएगा।
फिलहाल ये कैंप ‘इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट सेंटर’ के रूप में भी काम कर रहे हैं, जहां से सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को स्थानीय लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
सरकार ने यह भी बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में ISRO, NTRO, आईटीबीपी की तकनीकी शाखा और NSG के बम निरोधक दस्ते का अहम योगदान रहा है।
इस बीच, माओवादियों के प्रमुख कमांडर पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इसे राज्य सरकार की ‘पुनर्वास’ पहल के तहत बड़ी सफलता माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे माओवाद के खात्मे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।












