29 अक्टूबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Punjab Desk: कृषि विज्ञान केंद्र, मानसा की ओर से धान की पराली के सही प्रबंधन को लेकर गांव खत्रीवाला और बीरेवाला जट्टां में जागरूकता कैंप लगाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में सहायक प्रोफेसर (सब्जी विज्ञान) डॉ. तेजपाल सिंह सरां ने किसानों से कृषि विज्ञान केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
उन्होंने किसानों को घरेलू बागवानी, सब्जियों के पोषण मूल्य और इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही युवाओं को खेती से जुड़े सहायक व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित किया।
सहायक प्रोफेसर (मिट्टी और पानी इंजीनियरिंग) इंजीनियर आलोक गुप्ता ने किसानों को पराली प्रबंधन के लिए उपयोग की जाने वाली मशीनरी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों को धान की पराली खेत में ही मिलाने की सलाह दी और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना द्वारा विकसित सर्फेस सीडर और स्मार्ट सीडर जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी साझा की।
इंजीनियर गुप्ता ने बताया कि पराली जलाने से न केवल मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट होते हैं, बल्कि मिट्टी की सतह पर रहने वाले लाभकारी जीवाणु भी खत्म हो जाते हैं। इससे मिट्टी, हवा, पानी, पशु, पक्षी और मनुष्य—सभी को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि खेती को लंबे समय तक सफल बनाए रखने के लिए मिट्टी और पानी की सेहत को बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
अंत में सहायक प्रोफेसर (पौध सुरक्षा) डॉ. रणवीर सिंह ने किसानों को रबी फसलों में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा सुझाए गए मानकों के अनुसार कीटनाशक इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने गेहूं के बीज को जीवाणु कल्चर (राइजोबियम ट्रीटमेंट) से उपचारित करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला और बताया कि इससे मिट्टी की सेहत और फसल की उपज दोनों में सुधार होता है।
उन्होंने बताया कि किसान भाई कृषि विज्ञान केंद्र से गेहूं के बीज के साथ यह जीवाणु कल्चर भी प्राप्त कर सकते हैं। इन कैंपों में 150 से अधिक किसान शामिल हुए, जिन्हें खेती से संबंधित साहित्य और जानकारी भी उपलब्ध करवाई गई।













