श्रीकृष्ण के चरण कमल में 11 और 8 चिन्ह: मतलब और रहस्य

15 January 2026 Fact Recorder

Rashifal Desk:  भगवान श्रीकृष्ण के चरण माया और मोह से पूरी तरह मुक्त माने जाते हैं। उनके चरण कमल (Charan Kamal) भक्ति, शरण और मोक्ष का प्रतीक हैं। श्रीकृष्ण के चरणों में कुल 19 चिन्ह पाए जाते हैं – दाहिने पैर में 11 और बाएं पैर में 8, जिनमें हर चिन्ह का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है।

दाहिने पैर के 11 चिन्ह और उनके अर्थ

  1. चक्र – भक्त के छह शत्रु: काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ, ईर्ष्या का नाश।

  2. छत्र – भौतिक कष्टों का अंत।

  3. जौ – जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति; परमधाम की प्राप्ति।

  4. ऊर्ध्व रेखा – दिव्य परमधाम का मार्ग दिखाती है।

  5. ध्वज – भक्त की रक्षा करता है और विजय सुनिश्चित करता है।

  6. कमल – प्रेम और पवित्रता का प्रतीक।

  7. अंकुश – इंद्रियों को वश में करने का प्रतीक।

  8. स्वास्तिक – शुभता और मंगल का प्रतीक।

  9. वज्र – पूर्व जन्म के पापों का नाश।

  10. अष्टकोण – आठों दिशाओं से भक्त की रक्षा करता है।

  11. चार जंबू – फल आराध्य देव का प्रतीक।

बाएं पैर के 8 चिन्ह और उनके अर्थ

  1. आकाश – श्रीकृष्ण पूरी सृष्टि को आकाश रूप में समेटे हुए हैं।

  2. शंख – विजय और शक्ति का प्रतीक।

  3. चार कलश – चरणों का अमृत दर्शाते हैं।

  4. धनुष – शौर्य और साहस का प्रतीक।

  5. गाय का खुर – भक्तों को भवसागर से पार कराता है।

  6. त्रिकोण – संसार के त्रि-ताप और माया जाल से सुरक्षा।

  7. अर्धचंद्र – देवगण भी कृष्ण की स्तुति कर उनके चरण चिन्ह धारण करते हैं।

  8. मछली – बिना वंदना के पाप मुक्त जीवन संभव नहीं।

संक्षेप में:
श्रीकृष्ण के चरण कमल में प्रत्येक चिन्ह एक आध्यात्मिक संदेश और सुरक्षा का प्रतीक है। उनके चरणों में जाकर भक्त मोह, अभिमान और सांसारिक बंधनों से मुक्त हो सकते हैं। दाहिना पैर कर्म और विजय के प्रतीक चिन्ह लिए हुए है, जबकि बायां पैर सृष्टि, संरक्षण और मोक्ष से जुड़ा चिन्ह दर्शाता है।