13 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Health Desk: आम धारणा यह रही है कि अगर वजन नॉर्मल है और शुगर-कोलेस्ट्रॉल जैसे रूटीन टेस्ट ठीक हैं, तो लिवर भी हेल्दी होगा। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि नॉर्मल वजन होने के बावजूद भी फैटी लिवर हो सकता है। इसे लीन फैटी लिवर या नॉन-ओबेस फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है—और इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
दुबले-पतले लोगों में क्यों हो रहा फैटी लिवर?
लिवर विशेषज्ञ डॉ. अभिजीत पाण्डेय बताते हैं कि फैटी लिवर का सीधा संबंध मेटाबॉलिज्म से है, न कि केवल वजन से। बाहर से पतले दिखने वाले लोगों में भी लिवर के आसपास फैट जमा हो सकता है।
मुख्य कारण
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और शुगर (मीठे पेय, जंक/प्रोसेस्ड फूड)
लंबे समय तक बैठकर काम, शारीरिक गतिविधि की कमी
नींद की कमी, लगातार तनाव
इंसुलिन रेजिस्टेंस—जिससे लिवर फैट को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता
जेनेटिक रिस्क—परिवार में डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम या फैटी लिवर का इतिहास
क्यों खतरनाक है लीन फैटी लिवर?
यह स्थिति लंबे समय तक बिना लक्षण के रह सकती है, लेकिन आगे चलकर लिवर इंफ्लेमेशन, फाइब्रोसिस और सिरोसिस का जोखिम बढ़ा सकती है।
भारत में क्यों बढ़ रही हैं लिवर की समस्याएं?
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनियाभर में लिवर रोगों से होने वाली मौतों में लगभग 18% मामले भारत से रिपोर्ट होते हैं।
एक अध्ययन के अनुसार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में यह सामने आया कि करीब 38% भारतीय आबादी फैटी लिवर से प्रभावित हो सकती है—जिसमें बच्चे भी शामिल हैं।
वहीं इंडियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल रिसर्च में प्रकाशित शोध बताता है कि मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में लिवर रोगों का खतरा 60% से अधिक हो सकता है।
कैसे कम करें खतरा? (एक्सपर्ट टिप्स)
रोज़ाना 30–40 मिनट एक्टिविटी/वॉक
मीठे पेय, जंक और प्रोसेस्ड फूड सीमित करें
हाई-फाइबर, प्रोटीन-रिच डाइट अपनाएं
7–8 घंटे नींद, स्ट्रेस मैनेजमेंट
साल में एक बार लिवर फंक्शन टेस्ट और डॉक्टर की सलाह
नोट: यह लेख डॉक्टरों की सलाह और मेडिकल रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी लक्षण या संदेह की स्थिति में विशेषज्ञ से परामर्श लें।













