22 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Lifestyle Desk: कांजीवरम और मैसूर सिल्क साड़ियां साउथ इंडिया की सबसे प्रसिद्ध और पसंद की जाने वाली पारंपरिक साड़ियां हैं। दोनों ही साड़ियां देखने में रिच और रॉयल लगती हैं, लेकिन इनके बीच कई अहम अंतर होते हैं। कांजीवरम साड़ी, जिसे कांचीपुरम साड़ी भी कहा जाता है, तमिलनाडु के कांचीपुरम शहर में हाथों से बुनी जाती है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले मलबरी सिल्क का इस्तेमाल होता है और गोल्ड-सिल्वर जरी का भारी व बारीक काम किया जाता है। इसकी बुनाई कोरवाई तकनीक से होती है, जिसमें बॉडी, बॉर्डर और पल्लू अलग-अलग बुने जाते हैं, इसलिए यह साड़ी मोटी, भारी और बेहद टिकाऊ होती है तथा शादी और बड़े पारंपरिक आयोजनों के लिए आदर्श मानी जाती है। वहीं मैसूर सिल्क साड़ी कर्नाटक के मैसूर में बनाई जाती है और यह अपनी हल्केपन व सादगी के लिए जानी जाती है। इसे 100 प्रतिशत शुद्ध शहतूत रेशम से तैयार किया जाता है, जिससे इसका कपड़ा बेहद मुलायम, हल्का और पहनने में आरामदायक होता है। इसकी बुनाई इंटरलॉक्ड ताना-बाना तकनीक से की जाती है, जिसमें साधारण जियोमेट्रिक डिजाइन, पेस्टल रंग और हल्की गोल्ड या सिल्वर बॉर्डर देखने को मिलती है। जहां कांजीवरम साड़ी भव्य और शाही लुक देती है, वहीं मैसूर सिल्क साड़ी एलिगेंट, सॉफ्ट और लंबे समय तक पहनने के लिए ज्यादा सुविधाजनक मानी जाती है।













