Mohali 27 Dec 2025 Fact Recorder
Punjab Desk : अक्सर रसोई को केवल खाना बनाने की जगह माना जाता है, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई घर की सेहत, धन और खुशहाली का केंद्र होती है। रसोई की सही स्थिति, दिशा और रंग परिवार के जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। रसोई में मौजूद अग्नि तत्व पाचन शक्ति, मानसिक संतुलन और आर्थिक मजबूती से सीधे जुड़ा माना जाता है। यदि अग्नि तत्व संतुलित हो तो घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है, लेकिन असंतुलन से सेहत और धन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार रसोई की दिशा का विशेष महत्व होता है। यदि रसोई उत्तर या पूर्व दिशा में हो तो हरे रंग का उपयोग शुभ माना जाता है, क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है और स्वास्थ्य व प्रगति में सहायक होता है। वहीं, यदि रसोई दक्षिण या पश्चिम दिशा में स्थित हो तो पीला रंग लाभकारी माना जाता है, जो शांति, स्थिरता और पारिवारिक सुख का प्रतीक है।
रसोई के रंगों का चयन भी सोच-समझकर करना चाहिए। हल्का पीला, नारंगी या हल्का लाल रंग अग्नि तत्व को मजबूत करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। इसके विपरीत नीला और काला रंग रसोई के लिए अशुभ माने जाते हैं, क्योंकि ये अग्नि तत्व को कमजोर कर नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकते हैं।
इसके अलावा, गैस चूल्हा हमेशा दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए और पानी तथा आग के स्रोत एक-दूसरे के बहुत पास नहीं होने चाहिए। रसोई की साफ-सफाई भी बेहद जरूरी है। टूटे हुए बर्तन, कबाड़ या अव्यवस्थित सामान रखने से तनाव और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
रसोई में पर्याप्त रोशनी, अच्छा वेंटिलेशन और थोड़ी हरियाली को भी शुभ माना जाता है। छोटे पौधे या हल्के रंग की सजावट सकारात्मक वातावरण बनाती है। सही दिशा, रंग और साफ-सफाई के साथ रसोई को ऊर्जा के स्रोत में बदला जा सकता है, जो सेहत और खुशहाली लेकर आती है।
नोट: उपरोक्त जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।











