20 सितंबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Health Desk: बचपन का मोटापा: रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाज बचपन का मोटापा आज दुनिया की गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में गिना जाता है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। सितंबर माह को राष्ट्रीय बाल मोटापा जागरूकता माह (National Childhood Obesity Awareness Month) के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस बढ़ती समस्या के प्रति सचेत किया जा सके।
तेज़ रफ्तार जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी की वजह से खासकर शहरी बच्चों में मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर पर घंटों बिताना, जंक फूड व मीठे पेय पदार्थों का सेवन और प्रोसेस्ड फूड पर निर्भरता इस समस्या को और गहरा बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खेलों की कमी, पढ़ाई का दबाव और परिवार में मोटापे का इतिहास भी इसके जोखिम को बढ़ा देता है।
समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इसके अलावा मोटे बच्चों को सामाजिक तिरस्कार, आत्मविश्वास की कमी और मानसिक समस्याओं जैसे अवसाद व चिंता का भी सामना करना पड़ता है।
रोकथाम घर से शुरू करें
अच्छी खबर यह है कि बचपन का मोटापा रोका जा सकता है। इसके लिए माता-पिता की भूमिका सबसे अहम है। छोटी-छोटी आदतें बड़े बदलाव ला सकती हैं—
संतुलित आहार: बच्चों को घर का पौष्टिक भोजन दें, जिसमें फल, सब्ज़ियां, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हों। तैलीय व मीठे पेय सीमित करें।
नियमित व्यायाम: रोज़ाना कम से कम 60 मिनट तक साइक्लिंग, आउटडोर खेल या कोई भी शारीरिक गतिविधि जरूरी है।
स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण: टीवी, मोबाइल और वीडियो गेम पर समय तय करें, ताकि बच्चे सक्रिय रहें और नींद बेहतर हो।
रिवार की भागीदारी: परिवार साथ मिलकर व्यायाम करे और एक साथ भोजन करने की आदत डाले।
स्कूल की जिम्मेदारी: स्कूलों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना चाहिए और खेल-कूद व स्वास्थ्य शिक्षा को प्रोत्साहन देना चाहिए।
मिलकर बदलें भविष्य
राष्ट्रीय बाल मोटापा जागरूकता माह हमें यह याद दिलाता है कि यह सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य का सामूहिक संकल्प है। परिवार, स्कूल और समाज मिलकर ही अगली पीढ़ी को स्वस्थ, आत्मविश्वासी और सफल बना सकते हैं।













