क्या 32 साल की उम्र में दिमाग पूरी तरह मैच्योर हो जाता है? बचपन से बुढ़ापे तक दिमाग चार बड़े चरणों से गुजरता है

क्या 32 साल की उम्र में दिमाग पूरी तरह मैच्योर हो जाता है? बचपन से बुढ़ापे तक दिमाग चार बड़े चरणों से गुजरता है

27 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk:  इंसानी दिमाग जीवनभर बदलता और विकसित होता रहता है। उम्र बढ़ने के साथ दिमाग की संरचना और उसकी कार्यक्षमता पर भी गहरा असर पड़ता है। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक बड़े अध्ययन में यह सामने आया है कि दिमाग कुल चार अहम विकास चरणों से गुजरता है—9, 32, 66 और 83 साल की उम्र में। इन चरणों पर दिमाग की क्षमता, व्यवहार और सोचने के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव देखे जाते हैं।

शोध में 0 से 90 वर्ष के 3,800 से अधिक लोगों के दिमाग का आधुनिक तकनीक, जैसे MRI स्कैन के ज़रिए विश्लेषण किया गया।

दिमाग के चार मुख्य विकास चरण:

  1. 9 साल – बचपन से किशोरावस्था की ओर:
    इस उम्र में दिमाग तेज़ी से विकसित होता है। सीखने की क्षमता बढ़ती है और दिमाग के विभिन्न हिस्सों में संचार गति तेज होती जाती है।

  2. 32 साल – दिमाग की परिपक्वता का चरण:
    यह उम्र दिमाग के “एडल्ट मोड” में प्रवेश करने का महत्वपूर्ण मोड़ है।
    लगभग तीन दशक तक चलने वाला यह चरण दिमाग की स्थिरता और परिपक्वता का समय होता है।
    सोचने-समझने की क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और भावनात्मक परिपक्वता इस समय अपने शीर्ष पर होती है। इसी कारण कहा जाता है कि 32 वर्ष तक आते-आते व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह मैच्योर हो जाता है।

  3. 66 साल – बुढ़ापे की शुरुआत:
    इस उम्र के आसपास दिमाग की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
    हालांकि अनुभव और ज्ञान इस समय सबसे अधिक होता है। दिमाग ‘अर्ली एजिंग’ चरण में प्रवेश करता है।

  4. 83 साल – लेट एजिंग:
    इस चरण में दिमाग की संरचना में गिरावट के संकेत उभरने लगते हैं।
    याददाश्त में कमी और डिमेंशिया जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

शोध क्यों महत्वपूर्ण है?
मुख्य शोधकर्ता अलेक्सा मौस्ले के अनुसार इन चरणों को समझने से यह पता चलता है कि अलग-अलग उम्र में दिमाग अलग तरीके से क्यों विकसित होता है। यह ज्ञान भविष्य में सीखने की समस्याओं, याददाश्त की कमजोरी तथा दिमागी बीमारियों के इलाज और रोकथाम में मददगार साबित हो सकता है।