क्या बढ़ता प्रदूषण डायबिटीज मरीजों के लिए भी खतरनाक? एक्सपर्ट्स ने बताया इसका असर और बचाव के तरीके

क्या बढ़ता प्रदूषण डायबिटीज मरीजों के लिए भी खतरनाक? एक्सपर्ट्स ने बताया इसका असर और बचाव के तरीके

23 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk:  राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में इन दिनों ठंड के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। खराब हवा का असर आम लोगों की सेहत पर तो पड़ ही रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या बढ़ता प्रदूषण डायबिटीज के मरीजों के लिए भी खतरा बन सकता है? इस बारे में डॉक्टरों का कहना है कि हां, प्रदूषण शुगर मरीजों की सेहत को भी प्रभावित कर सकता है।

एमसीडी दिल्ली में तैनात डॉक्टर अजय कुमार बताते हैं कि हवा में मौजूद बारीक प्रदूषित कण, खासकर PM2.5, सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंच जाते हैं। ये कण शरीर में इंफ्लामेशन बढ़ाते हैं, जिससे डायबिटीज मरीजों में इंसुलिन के काम करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है।

डॉक्टर के मुताबिक, ज्यादा प्रदूषण के संपर्क में आने से शरीर में हार्मोनल असंतुलन भी हो सकता है। खासतौर पर कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे अचानक शुगर लेवल हाई होने का खतरा रहता है। हालांकि यह असर हर डायबिटीज मरीज में एक जैसा नहीं होता, लेकिन कुछ लोगों में जोखिम ज्यादा बढ़ सकता है।

इन डायबिटीज मरीजों को ज्यादा खतरा
डॉक्टरों के अनुसार, प्रदूषण का असर खासतौर पर इन मरीजों पर ज्यादा हो सकता है—

  • जिनकी शुगर लंबे समय से कंट्रोल में नहीं रहती

  • 60 साल से अधिक उम्र के मरीज

  • जो इंसुलिन पर निर्भर हैं

  • जिन्हें हार्ट या किडनी से जुड़ी बीमारियां भी हैं

डायबिटीज मरीज कैसे करें बचाव?
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए शुगर मरीजों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है—

  • सुबह की वॉक बाहर करने से बचें

  • बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें

  • दवाएं समय पर लें

  • रोजाना ब्लड शुगर लेवल की जांच करें

अगर शुगर लेवल बढ़ जाए तो क्या करें?
अगर ब्लड शुगर लेवल बढ़ता हुआ नजर आए तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं की डोज न बदलें। तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें और उन्हीं के निर्देश के अनुसार दवाएं लें। खानपान में सावधानी रखें, मीठे और फास्ट फूड से दूरी बनाएं। बाहर एक्सरसाइज करने के बजाय घर के अंदर हल्की वॉक और व्यायाम करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि कोई भी दवा मिस न हो।

कुल मिलाकर, बढ़ता प्रदूषण सिर्फ सांस की बीमारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि डायबिटीज मरीजों के लिए भी यह एक गंभीर जोखिम बन सकता है। सही सावधानी और समय पर इलाज से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।