30 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: आम आदमी की महंगाई को मापने के तरीके में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2023-24 करने का फैसला किया है। इस बदलाव से महंगाई के आंकड़ों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों का असर अब ज्यादा सटीक तरीके से दिखेगा।
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, नए वेटेज लागू होने पर कुल महंगाई दर में करीब 20–30 आधार अंकों का मामूली फर्क पड़ सकता है। हालांकि, जिन महीनों में खाद्य महंगाई ज्यादा होगी, उन महीनों में नया CPI पुराने इंडेक्स के मुकाबले कम महंगाई भी दिखा सकता है।
महंगाई मापने का तरीका क्यों बदला?
सरकार का मानना है कि बीते एक दशक में लोगों के खर्च करने का पैटर्न बदल गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने विशेषज्ञ समूह की सिफारिशों के आधार पर CPI सीरीज को अपडेट किया है, ताकि महंगाई का आकलन वैश्विक मानकों और वर्तमान खर्च के अनुरूप हो सके।
नई CPI सीरीज की खास बातें
358 वस्तुएं शामिल, जिन्हें 12 डिवीजन, 43 समूह और 192 उप-वर्गों में बांटा गया है।
पहला नया CPI डेटा 12 फरवरी 2026 को जारी होगा।
जनवरी 2025 से इंडेक्स डेटा और जनवरी 2026 की महंगाई दर शामिल होगी।
ग्रामीण, शहरी और संयुक्त स्तर पर बैक सीरीज डेटा भी जारी किया जाएगा।
वेटेज में क्या बदला?
खाद्य व पेय पदार्थों का वजन घटकर 45.86 से 36.75।
आवास, पानी, बिजली, गैस और ईंधन का वजन बढ़कर 17.66।
परिवहन, सूचना और संचार का वजन 8.59 से बढ़कर 12.41।
स्वास्थ्य, घरेलू सामान और व्यक्तिगत सेवाओं का प्रभाव भी बढ़ा।
आम आदमी पर क्या असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, नए CPI से महंगाई की तस्वीर ज्यादा यथार्थवादी होगी। खाने-पीने की चीजों का असर थोड़ा कम और घर, बिजली, ट्रांसपोर्ट व सेवाओं का असर ज्यादा दिखेगा। इससे भविष्य में नीतिगत फैसले बेहतर होंगे और कुछ सेक्टरों में कीमतें स्थिर या सस्ती होने की उम्मीद भी बन सकती है।













