25 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: भारत ने अपनी हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने स्वदेशी लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट कुशा के पहले डेवलपमेंट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इसे देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
इस प्रोजेक्ट के विकास में Bharat Electronics Limited (BEL) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हालिया परीक्षणों में ग्राउंड वैलिडेशन और ड्यूल-पल्स रॉकेट मोटर जैसे प्रमुख सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया। अब यह प्रोजेक्ट अगले चरण यानी इंटीग्रेटेड फ्लाइट टेस्ट की ओर बढ़ रहा है, जिसके इसी साल होने की उम्मीद है।
क्या है प्रोजेक्ट कुशा?
प्रोजेक्ट कुशा, जिसे आधिकारिक तौर पर Extended Range Air Defence System (ERADS) कहा जाता है, भारत का स्वदेशी लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे रूस के उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम S-400 और S-500 के समकक्ष विकसित किया जा रहा है। करीब 21,700 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य देश के बड़े शहरों और सैन्य ठिकानों को मजबूत सुरक्षा कवच देना है।
तीन-स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली
प्रोजेक्ट कुशा की खासियत इसकी मल्टी-लेयर डिफेंस क्षमता है। इसमें तीन प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होंगी:
- M1 मिसाइल: करीब 150 किमी रेंज, फाइटर जेट और प्रिसिजन हथियारों को रोकने में सक्षम।
- M2 मिसाइल: लगभग 250 किमी रेंज, AESA तकनीक के साथ ज्यादा सटीकता।
- M3 मिसाइल: 350–400 किमी से ज्यादा रेंज, AWACS और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे बड़े टारगेट को इंटरसेप्ट करने में सक्षम।
इन तीनों स्तरों के जरिए दुश्मन के हवाई हमलों को कई चरणों में रोका जा सकेगा।
क्यों अहम है यह सिस्टम
यह एयर डिफेंस सिस्टम स्टील्थ फाइटर जेट, ड्रोन, क्रूज़ मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने में सक्षम होगा। इससे भारतीय वायुसेना की हवाई सुरक्षा क्षमता काफी मजबूत होगी।
तैनाती की संभावित टाइमलाइन
- 2026: फ्लाइट टेस्ट की शुरुआत
- 2028: शुरुआती ऑपरेशनल तैनाती
- 2030: पूर्ण तैनाती का लक्ष्य
प्रोजेक्ट कुशा को भारत के मिशन सुदर्शन चक्र का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य 2035 तक देशभर में मजबूत एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क तैयार करना है। यह सिस्टम Akash-NG और बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के साथ मिलकर काम करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रोजेक्ट कुशा भारत की रक्षा क्षमता को नई मजबूती देने के साथ-साथ उन्नत एयर डिफेंस तकनीक में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।













