महंगे कच्चे तेल से भारत की ग्रोथ पर खतरा, 100 डॉलर पार हुआ तो बढ़ेगी महंगाई

03 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Business Desk:  पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता दिख रहा है। CareEdge Ratings की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं तो आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट और महंगाई में तेजी आ सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, यदि क्रूड ऑयल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 में भारत की GDP ग्रोथ घटकर लगभग 6.5% तक आ सकती है। जबकि पहले, जब कीमतें 60-70 डॉलर के बीच थीं, तब ग्रोथ का अनुमान 7.2% था। 90 डॉलर प्रति बैरल पर यह अनुमान पहले ही घटकर 6.7% तक आ चुका है।

अगर तेल की कीमतें और बढ़कर 110-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो ग्रोथ और गिरकर 6% या उससे नीचे जा सकती है। इससे साफ है कि महंगा कच्चा तेल देश की आर्थिक रफ्तार को सीधे प्रभावित कर सकता है।

महंगाई पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहां 60-70 डॉलर प्रति बैरल पर महंगाई 4.3% रहने का अनुमान था, वहीं 100 डॉलर पर यह बढ़कर 5% से ऊपर जा सकती है। अगर कीमतें 110-120 डॉलर तक पहुंचती हैं, तो महंगाई 6% के करीब पहुंचने की आशंका है।

तेल की बढ़ती कीमतों का असर अलग-अलग सेक्टरों पर अलग तरीके से पड़ेगा। एयरलाइन, पेट्रोकेमिकल, सिरेमिक और ग्लास उद्योग पर सबसे ज्यादा दबाव आएगा, क्योंकि इनकी लागत तेजी से बढ़ेगी। वहीं ऑयल मार्केटिंग, उर्वरक, टायर और पैकेजिंग सेक्टर भी प्रभावित होंगे।

हालांकि, गैस डिस्ट्रीब्यूशन, सीमेंट, कंस्ट्रक्शन, ऑटो और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर इसका असर मध्यम रहने की संभावना है, जबकि अपस्ट्रीम ऑयल-गैस, पावर, फार्मा और कोयला सेक्टर अपेक्षाकृत कम प्रभावित हो सकते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फिलहाल घरेलू मांग के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो आगे चलकर विकास दर और आम लोगों की जेब—दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।