छठी पीढ़ी के फाइटर में भारत की एंट्री? फ्रांस-जर्मनी के FCAS पर टिकी नई रणनीतिक नजर

24 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  भारत ने फ्रांस को यह संकेत दिया है कि अगर फ्रांस-जर्मनी का संयुक्त छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान कार्यक्रम टूटता है, तो वह इसमें साझेदार बनने को तैयार है। यह कार्यक्रम Future Combat Air System (FCAS) के तहत चल रहा है, जिसका लक्ष्य 2040 के दशक में Dassault Aviation के Rafale और Eurofighter Typhoon को प्रतिस्थापित करना है।

भारत की दिलचस्पी कहां?

सूत्रों के मुताबिक, भारत ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा फ्रेंच-जर्मन साझेदारी में दरार आती है तो वह सह-विकास और सह-उत्पादन पर बातचीत के लिए तैयार है। खास तौर पर भारत की रुचि New Generation Fighter (NGF) में है, जो FCAS का मुख्य पायलटेड प्लेटफॉर्म होगा।

FCAS क्यों फंसा?

काम के बंटवारे और डिजाइन कंट्रोल को लेकर Dassault Aviation और Airbus के बीच मतभेद सामने आए हैं।

  • फ्रांस चाहता है कि विमान भविष्य के एयरक्राफ्ट कैरियर से भी ऑपरेट कर सके।

  • जर्मनी लंबी दूरी वाले, भारी इंटरसेप्टर मॉडल पर जोर दे रहा है।

NGF की ताकत

NGF को एक भारी, हाई-एंड फाइटर के तौर पर डिजाइन किया जा रहा है, जो “रिमोट कैरियर्स” यानी ड्रोन के झुंड का नेतृत्व करेगा।

  • अनुमानित अधिकतम टेक-ऑफ वजन: 30–32 टन

  • तुलना में राफेल: ~24.5 टन

  • वजन और भूमिका के लिहाज से F-22 Raptor और Sukhoi Su-57 के करीब

यदि भारत जुड़ता है, तो यह प्लेटफॉर्म उसके स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) से एक स्तर ऊपर की क्षमताएं दे सकता है, जबकि Sukhoi Su-30MKI से हल्का रहेगा—यानी भविष्य की एयरफोर्स संरचना में नया संतुलन।

इंजन टेक्नोलॉजी में बड़ा प्लस

FCAS के लिए वैरिएबल-साइकिल इंजन EUMET विकसित कर रहा है, जिसमें Safran, MTU Aero Engines और ITP Aero शामिल हैं। अहम बात यह है कि Safran, इसी टेक्नोलॉजी के आधार पर AMCA Mk-2 के लिए ~120 kN इंजन के सह-विकास में भी भारत का भागीदार है—इससे भारत-फ्रांस एयरोस्पेस सहयोग और मजबूत होता है।

क्या दो हिस्सों में बंटेगा प्रोग्राम?

संभावना है कि FCAS दो अलग विमानों में विभाजित हो—

  • फ्रांस: हल्का, कैरियर-कैपेबल मॉडल

  • जर्मनी-स्पेन: भारी, लंबी दूरी का इंटरसेप्टर
    भारत की ज़मीनी और समुद्री जरूरतों को देखते हुए उसका झुकाव फ्रांस के विजन के करीब माना जा रहा है।

भारत को फायदा क्या?

  • छठी पीढ़ी की स्टेल्थ, एडवांस इंजन और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर

  • AMCA को तकनीकी छलांग का अवसर (शर्त: साझेदारी स्वदेशी कार्यक्रम को मजबूत करे)

निष्कर्ष: बातचीत अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन अगर फ्रांस-जर्मनी साझेदारी में दरार गहराती है, तो FCAS भारत के लिए छठी पीढ़ी की तकनीक में प्रवेश का बड़ा रणनीतिक मौका बन सकता है।