14 मई, 2025 Fact Recorder
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत ने चीन को दिया करारा जवाब: “नाम बदलने से सच्चाई नहीं बदलती”
भारत ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों को नए नाम देने की चीन की कोशिशों को सख्ती से खारिज किया है। चीन अरुणाचल प्रदेश को “जांगनान” यानी तिब्बत का दक्षिणी हिस्सा बताता है। इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार को स्पष्ट किया कि यह कवायद निरर्थक और हास्यास्पद है, और भारत की स्थिति अटल और स्पष्ट है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने कहा,
“हमने देखा है कि चीन अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की व्यर्थ और हास्यास्पद कोशिशों को लगातार दोहरा रहा है। हमारी सैद्धांतिक और अटल नीति के अनुसार हम ऐसी हर कोशिश को सिरे से खारिज करते हैं। केवल रचनात्मक नामकरण से यह अटल सच्चाई नहीं बदल सकती कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा।”
चीन अक्सर अरुणाचल प्रदेश को अपना क्षेत्र बताकर वहां के कई स्थानों के लिए नए नामों की सूची जारी करता रहा है। साल 2024 में भी उसने ऐसे 30 नाम घोषित किए थे, जिन्हें भारत ने पूरी तरह से नकार दिया था।
सीमा विवाद की पृष्ठभूमि
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। यह क्षेत्र चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से लगा हुआ है। बीजिंग इसे ऐतिहासिक तिब्बत का हिस्सा बताता है, जबकि भारत इसे 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही अपने प्रशासनिक नियंत्रण में रखे हुए है।
जल संकट और “जल बम” का खतरा
इस सीमा विवाद के बीच अब जल संसाधनों के उपयोग को लेकर भी तनाव बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण है चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो नदी (जो भारत में सियांग और फिर ब्रह्मपुत्र बनती है) पर विश्व का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध बनाने की योजना। यह बांध तिब्बत के मेडोग काउंटी में बनाया जा रहा है, जिससे भारत और अन्य पड़ोसी देशों को गंभीर खतरे की आशंका है।
अरुणाचल प्रदेश से बीजेपी सांसद और प्रदेश अध्यक्ष तापिर गावो ने चीन की इस योजना को “जल बम” करार दिया। उन्होंने कहा,
“चीन 60,000 मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता वाला एक विशाल बांध बना रहा है। यह सिर्फ एक बांध नहीं, बल्कि एक जल बम है जिसे भारत और अन्य निचले इलाकों के देशों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जून 2000 की बाढ़, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के 10 से अधिक पुल बह गए थे, कथित तौर पर चीन द्वारा बिना सूचना दिए पानी छोड़ने से हुई थी।तापिर गावो ने सुझाव दिया कि भारत को अरुणाचल प्रदेश के भीतर एक संतुलनकारी बांध का निर्माण करना चाहिए ताकि यदि चीन अचानक पानी छोड़े तो नीचे की ओर आने वाली बाढ़ से बचाव किया जा सके।
निष्कर्ष
भारत ने एक बार फिर चीन को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि नाम बदलने या दावे करने से वास्तविकता नहीं बदलती। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा – और इस पर कोई समझौता नहीं होगा। साथ ही, चीन के जल प्रबंधन को लेकर उठती चिंताओं पर भारत को सतर्क रहना होगा और रणनीतिक तैयारियां करनी होंगी।












