21 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति पर मंडराते खतरे के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक बार फिर चर्चा में है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी के आयात पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े बताते हैं कि देश की बड़ी ऊर्जा जरूरतें अभी भी विदेशी सप्लाई पर टिकी हुई हैं।
मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है, जिसका असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ सकता है। इसी बीच भारत में 20 मार्च को प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में करीब 2.09 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई।
कच्चे तेल में सबसे ज्यादा निर्भरता
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 से 88 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। वित्त वर्ष 2023-24 में देश ने करीब 232.5 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात किया था। भारत में रोजाना लगभग 55 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है।
भारत को तेल की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में रूस (लगभग 37-40%), इराक (करीब 21%), सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं।
प्राकृतिक गैस में भी आधी जरूरत आयात से
देश में प्राकृतिक गैस की कुल खपत करीब 189 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है। इसमें से 50 प्रतिशत से अधिक जरूरत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात से पूरी की जाती है।
घरेलू स्तर पर करीब 97.5 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन गैस का उत्पादन होता है। भारत अपनी LNG का लगभग 47-50 प्रतिशत हिस्सा कतर से आयात करता है, जबकि यूएई, अमेरिका और ओमान भी इसके प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।
एलपीजी के लिए भी विदेशों पर निर्भरता
रसोई गैस यानी एलपीजी की बात करें तो भारत अपनी कुल खपत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसमें से लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत तक पहुंचती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव या समुद्री मार्गों में किसी भी बाधा का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। इसलिए ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ाना भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक आवश्यकता बन गया है।













