“पता नहीं कब तक रहेंगी सरहदों की दूरियां…”- ज्योति मल्होत्रा की डायरी में पाकिस्तान को लेकर बड़ा खुलासा

20 मई, 2025 Fact Recorder

ज्योति मल्होत्रा की डायरी से पाकिस्तान को लेकर कई अहम खुलासे, NIA की जांच तेज

जासूसी के आरोपों में गिरफ्तार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की डायरी से पाकिस्तान को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। डायरी में पाकिस्तान यात्रा के अनुभव, वहां की जनता के प्रति सहानुभूति, और भारत-पाक रिश्तों पर उसकी सोच को लेकर कुछ ऐसे बयान दर्ज हैं जो जांच एजेंसियों को चिंता में डाल रहे हैं।

डायरी में लिखा: “हम सब एक ही धरती, एक ही मिट्टी के हैं…”

ज्योति की 2012 की एक पीली रंग की डायरी के तीन पन्नों पर पाकिस्तान यात्रा का जिक्र है, जिसमें उसने लिखा—

“पता नहीं कब तक रहेंगी सरहदों की दूरियां… दिलों में जो गिले-शिकवे हैं वो मिट जाएं। पाकिस्तान की आवाम से मोहब्बत मिली। सबस्क्राइबर और फ्रेंड्स मिलने आए।”

इस डायरी से स्पष्ट है कि ज्योति न केवल पाकिस्तानी लोगों से जुड़ी रही, बल्कि भारत-पाक बंटवारे की पीड़ा भी उसमें दर्ज है। एक जगह उसने लिखा—

“पाकिस्तान सरकार से गुजारिश है कि और गुरुद्वारों व मंदिरों के रास्ते खोले जाएं ताकि लोग वहां जाकर अपनी विरासत से जुड़ सकें।”

पूरा होमवर्क करती थी विदेश यात्रा से पहले

डायरी के कई पन्नों में ज्योति ने विदेश यात्रा से जुड़ी जानकारियां, यात्रा खर्च और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भ दर्ज किए हैं। इससे पता चलता है कि वह हर देश की यात्रा से पहले शोध करती थी।

NIA की पूछताछ और पहलगाम कनेक्शन

एनआईए ने हाल ही में ज्योति से करीब 7 घंटे की पूछताछ की। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि जनवरी 2025 में जब वह पहलगाम गई थी, उस दौरान हुए आतंकी हमले से उसका कोई कनेक्शन है या नहीं।
सिर्फ दो साल में तीन बार पाकिस्तान यात्रा, आतंक प्रभावित क्षेत्रों में वीडियो शूट करना, और पाकिस्तान की छवि को सकारात्मक दिखाना—ये तमाम पहलू अब एनआईए के रडार पर हैं।

परिवार भी सदमे में

ज्योति के पिता हरीश मल्होत्रा का कहना है कि वह मानसिक रूप से टूट चुके हैं। एकलौती बेटी की गिरफ्तारी ने परिवार को झकझोर दिया है। वह कहते हैं, “ज्योति की शादी की उम्मीद थी, अब उसकी रिहाई की दुआ कर रहा हूं।”

डिजिटल सबूतों की छानबीन जारी

जांच एजेंसी ने ज्योति का मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर एफएसएल जांच के लिए भेज दिए हैं। इससे यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि उसके बनाए गए वीडियोज़ किसी आतंकी गतिविधि में मददगार तो नहीं बने। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि वह इन यात्राओं के दौरान किससे संपर्क में थी।

क्या वाकई ग़लती या साजिश?

ज्योति ने खुद एक वीडियो में कहा था—

“जो भी आतंकियों की मदद करता है, वो भारतीय नहीं हो सकता।”

अब जांच एजेंसियां तय करेंगी कि उसकी यात्राएं और विचार महज व्यक्तिगत दृष्टिकोण थे या देश की सुरक्षा के खिलाफ एक सोची-समझी रणनीति।                                                                                               निष्कर्ष: ज्योति मल्होत्रा की डायरी ने पाकिस्तान को लेकर उसके झुकाव और सोच की परतें खोली हैं, जिनकी गूंज अब राष्ट्रीय सुरक्षा के गलियारों तक पहुंच चुकी है। NIA की जांच में आने वाले दिन और खुलासे ला सकते हैं।