“मैं कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता…” Narendra Modi ने बताई इसकी वजह

16 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वह अपने स्वभाव से कभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते। उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले व्यक्ति के भीतर एक “सकारात्मक बेचैनी” बनी रहनी चाहिए, जो लगातार बेहतर करने की प्रेरणा देती है।

समाचार एजेंसी Press Trust of India (PTI) को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री से जब ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत चल रहे बदलावों पर संतुष्टि को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और हो भी नहीं सकते। उनके अनुसार, देश और जनता के लिए कुछ और बेहतर करने की इच्छा हमेशा बनी रहती है।

सुधारों की दिशा में बड़े बदलाव
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने छोटे-छोटे बदलावों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि नीतिगत और संरचनात्मक स्तर पर बड़े सुधार लागू किए हैं। उन्होंने इसे सरकार की प्रतिबद्धता बताया और कहा कि देश अब सुधारों के जरिए नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

बढ़ती वैश्विक भागीदारी
मोदी ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हुए व्यापार समझौते अचानक नहीं हुए, बल्कि मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, प्रतिस्पर्धी उद्योग और स्थिर नीतियों का परिणाम हैं।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, पिछली सरकारों के दौरान भी कुछ व्यापार समझौतों पर बातचीत हुई थी, लेकिन ठोस परिणाम नहीं निकल पाए। मौजूदा सरकार के दौरान नीतिगत स्पष्टता और राजनीतिक स्थिरता से अंतरराष्ट्रीय भरोसा बढ़ा है।

38 देशों के साथ FTA
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। ये समझौते विभिन्न महाद्वीपों और आर्थिक ताकत वाले देशों के साथ हुए हैं, जिससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुंच मिली है।
उन्होंने कहा कि सुधारों की यात्रा जारी है और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है।