04 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद जहां कई क्षेत्रों में राहत की उम्मीद जगी है, वहीं अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 232 भारतीय कंपनियों के लिए बड़ी अड़चन बनकर सामने आ रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और कुछ ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स जैसी वस्तुएं इस समझौते के दायरे से फिलहाल बाहर रह सकती हैं।
दरअसल, अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इन उत्पादों पर धारा 232 के तहत भारी टैरिफ लगा रखे हैं। मौजूदा समय में स्टील और एल्युमीनियम पर करीब 50 फीसदी, जबकि कुछ ऑटो पार्ट्स पर 25 फीसदी शुल्क लागू है। ऐसे में इन सेक्टरों की भारतीय कंपनियों को इस ट्रेड डील से तुरंत पूरा लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा।
हालांकि, भारत को उम्मीद है कि आने वाले चरणों में इन उत्पादों पर भी राहत मिल सकती है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, “धारा 232 के तहत लगाए गए शुल्क अभी बने रह सकते हैं, लेकिन भविष्य में भारत को इसमें कुछ रियायत मिलने की संभावना है।”
मोदी-ट्रंप बातचीत के बाद हुआ ऐलान
यह व्यापार समझौता सोमवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के बाद घोषित किया गया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर रहा है। इसके साथ ही, रूसी तेल खरीद के कारण भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 फीसदी पेनल्टी टैरिफ भी हटाने का फैसला लिया गया है।
भारत ने किन शर्तों पर जताई सहमति
समझौते के तहत भारत ने रूसी तेल की खरीद रोकने, अमेरिका से ऊर्जा, कोयला, तकनीक और अन्य उत्पादों की खरीद बढ़ाने पर सहमति जताई है। कुल मिलाकर अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक की खरीद की प्रतिबद्धता दी गई है। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में शून्य टैरिफ की भी बात तय हुई है।
सरकार का दावा—अब तक का सर्वश्रेष्ठ सौदा
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस समझौते को “भारत के लिए अब तक का सबसे बेहतर सौदा” बताया। उन्होंने कहा कि यह डील बांग्लादेश, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारत को मजबूत स्थिति में लाती है।
गोयल ने स्पष्ट किया कि कृषि, डेयरी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। वहीं, टेक्सटाइल, चमड़ा, आभूषण, मछली पालन और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने वाली है। इसके साथ ही, उच्च प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर और अन्य उभरते क्षेत्रों में सहयोग भी मजबूत होगा।
आगे क्या?
समझौते की विस्तृत रूपरेखा को लेकर अगले 2-3 दिनों में संयुक्त बयान जारी होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारतीय निर्यात को एशियाई प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाएगी, जहां टैरिफ आमतौर पर 20-30 फीसदी के बीच रहते हैं। हालांकि, धारा 232 के तहत आने वाले स्टील और ऑटो सेक्टर को फिलहाल राहत के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।













