फाइनल राउंड से पहले महागठबंधन कैसे कर रहा है डैमेज कंट्रोल? 5 अहम बातें

फाइनल राउंड से पहले महागठबंधन कैसे कर रहा है डैमेज कंट्रोल? 5 अहम बातें

29 अक्टूबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Politics Desk: Bihar Elections 2025: फाइनल राउंड से पहले डैमेज कंट्रोल मोड में महागठबंधन, जानिए 5 बड़ी रणनीतियां                                                                                                          बिहार विधानसभा चुनाव में वोटिंग से पहले महागठबंधन अब डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। सीट बंटवारे में देरी और अंदरूनी मतभेदों के कारण एनडीए को हमला करने का मौका देने के बाद अब गठबंधन एकजुटता का संदेश देने में सक्रिय है। साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर घोषणापत्र और संयुक्त रैलियों तक, हर कदम पर ‘सब ठीक है’ दिखाने की कोशिश हो रही है।
 संवाद की कमी को दूर करने की पहल

सीट बंटवारे पर असहमति के बाद आरजेडी, कांग्रेस और वीआईपी ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी, जिससे कई सीटों पर आपसी टकराव की स्थिति बनी। इस स्थिति को संभालने के लिए कांग्रेस ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत को पटना भेजा, जिन्होंने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मुलाकात की। यही मुलाकात गठबंधन में सुधार की पहली पहल मानी गई।

 पटना में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस

23 अक्टूबर को पटना में महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमें तेजस्वी यादव को आधिकारिक तौर पर सीएम फेस घोषित किया गया। हालांकि, राहुल गांधी की गैरमौजूदगी ने बीजेपी को हमला करने का मौका दे दिया।

 घोषणापत्र में राहुल की वापसी

28 अक्टूबर को जारी किए गए घोषणापत्र में इस गलती को सुधारा गया। इस बार तेजस्वी के साथ राहुल गांधी की तस्वीर को प्रमुखता दी गई। इसे “बिहार का तेजस्वी प्रण” नाम दिया गया, जिसमें अगले पांच साल की कार्ययोजना बताई गई है।

 एनडीए से पहले घोषणापत्र जारी

सीट बंटवारे में भले महागठबंधन पीछे रहा, लेकिन घोषणापत्र जारी करने में उसने एनडीए को पीछे छोड़ दिया। इससे गठबंधन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि अब वह संगठित और तैयार है।

 राहुल और तेजस्वी की संयुक्त रैलियां

राहुल गांधी ने बुधवार को बिहार प्रचार की शुरुआत सकरा से की, जहां वे कांग्रेस उम्मीदवार के लिए वोट मांगेंगे। इसके बाद दरभंगा में तेजस्वी यादव के साथ मंच साझा करेंगे। इस रैली का मकसद यह दिखाना है कि फ्रेंडली फाइट के बावजूद गठबंधन एकजुट है। इसके अलावा, कांग्रेस ने यह तय किया है कि जिन 11 सीटों पर फ्रेंडली फाइट है, वहां उसके बड़े नेता प्रचार नहीं करेंगे। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी की कुल 22 रैलियों का कार्यक्रम तय हुआ है, जिनमें से कोई भी विवादित सीटों पर नहीं होगी।

निष्कर्ष:
महागठबंधन अब एकजुटता का मजबूत संदेश देने में जुटा है। अशोक गहलोत की सुलह बैठक से लेकर राहुल-तेजस्वी की साझा रैली तक, हर कदम का मकसद एक ही है — मतदाताओं को भरोसा दिलाना कि “गठबंधन में सब ठीक है।”