18 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Himachal Desk: आर्थिक मोर्चे पर सख्त कदम उठाते हुए Himachal Pradesh Government ने वीआईपी खर्चों में कटौती और वेतन में कमी का फैसला लिया है। आमजन की आलोचनाओं के बीच सरकार ने कैबिनेट रैंक प्राप्त कई पदों का दर्जा वापस लेने के साथ ही संबंधित पदाधिकारियों के वेतन में 20 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय किया है।
सूत्रों के अनुसार, बुधवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे चरण में मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu स्वयं और मंत्रियों व विधायकों के वेतन में कटौती से जुड़े फैसलों की घोषणा कर सकते हैं।
दरअसल, पिछले वर्ष बजट सत्र के अंतिम दिन सरकार ने विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी का निर्णय लिया था। इसके साथ ही मंत्रियों के भत्तों में भी वृद्धि की गई थी और पूर्व विधायकों की पेंशन में इजाफा किया गया था।
बताया जा रहा है कि बजट सत्र से पहले 18 मार्च को हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में RS Bali और Bhawani Singh Pathania ने कैबिनेट रैंक समेत अन्य सुविधाओं में कटौती का प्रस्ताव रखा था।
पहले बढ़ा था विधायकों का वेतन
वेतन वृद्धि से पहले प्रत्येक विधायक को लगभग 2.10 लाख रुपये मासिक वेतन मिलता था, जो बढ़ोतरी के बाद करीब 2.95 लाख रुपये प्रति माह हो गया था। वहीं, पूर्व विधायकों की मासिक पेंशन 93,240 रुपये से बढ़कर लगभग 1.29 लाख रुपये कर दी गई थी। एक से अधिक बार विधायक रहने वालों को हर वर्ष 1,000 रुपये अतिरिक्त मासिक पेंशन का लाभ भी मिलता है।
मंत्रियों के भत्तों में भी हुई थी बढ़ोतरी
16 अक्टूबर 2025 को लागू नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री का कुल मासिक वेतन और भत्ते लगभग 3.40 लाख रुपये तय किए गए थे। वहीं विधानसभा अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री, नेता प्रतिपक्ष और मुख्य सचेतक को करीब 3.20 लाख रुपये प्रतिमाह मिल रहे थे। इसके अलावा राज्य मंत्री और उप मुख्य सचेतक को लगभग 3.18 लाख रुपये, विधानसभा उपाध्यक्ष को 3.17 लाख रुपये और उप मंत्री को करीब 3.05 लाख रुपये वेतन व भत्तों सहित दिए जा रहे थे।
सरकार के इस नए फैसले को आर्थिक अनुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे सरकारी खर्चों पर नियंत्रण की कोशिश की जा रही है।













